सूरजकुंड दिवाली मेले से स्वदेशी उत्पादों और कारीगरों को मिल रहा नया बाजार: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

सूरजकुंड दिवाली मेले से कारीगरों को नया बाजार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया उद्घाटन

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फरीदाबाद/चंडीगढ़, 23 अक्टूबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेला स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ कारीगरों, शिल्पकारों और स्थानीय उद्यमियों को नया बाजार उपलब्ध कराने का सार्थक प्रयास है। इस मेले का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाना है, ताकि कारीगरों को अपने परिश्रम का उचित लाभ मिल सके और उनके उत्पादों को नए ग्राहक मिलें। मुख्यमंत्री शुक्रवार को फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में दिवाली मेले के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। समारोह में कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।मुख्यमंत्री ने मेले में पहुंचने वाले आगंतुकों और पर्यटकों का स्वागत करते हुए उन्हें करवा चौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली, विश्वकर्मा पूजन, गोवर्धन पूजन, भाई दूज और छठ पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित यह मेला भारतीय हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक खानपान को करीब से जानने का अवसर प्रदान करता है। यहां परिवार पारंपरिक कलाओं और स्थानीय उत्पादों का अनुभव करने के साथ कारीगरों के बनाए सामान की खरीदारी भी कर सकते हैं।

स्वदेशी अपनाकर कारीगरों की आजीविका को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आत्मनिर्भरता और ‘वोकल फॉर लोकल’ की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए गांवों के कुम्हारों, बुनकरों, बढ़ई, छोटे दुकानदारों और महिला उद्यमियों को आगे बढ़ने के अवसर देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि त्योहारों पर स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पाद खरीदने से उनके परिवारों की आजीविका को सहारा मिलता है। इससे उन्हें कच्चा माल खरीदने, नए उत्पाद तैयार करने और अपने काम का विस्तार करने में मदद मिलती है। साथ ही, उनके साथ जुड़े अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली की सबसे सुंदर रोशनी वह है, जो हमारे घरों के साथ-साथ किसी मेहनतकश परिवार के घर को भी रोशन करे। स्वदेशी अपनाने का अर्थ अपने देश की प्रतिभा और कौशल पर भरोसा करना है। घर की सजावट, पहनावे और त्योहारों के उपहारों में भारतीय हस्तशिल्प को प्राथमिकता देकर कारीगरों की मेहनत का सम्मान किया जा सकता है।

कारीगरों के उत्पादों की बिक्री के लिए बनाए जा रहे सांझा बाजार

मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार प्रदेश में स्थानीय उत्पादों की बिक्री और विपणन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर सांझा बाजार स्थापित किए जा रहे हैं। इन बाजारों के माध्यम से कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश में 10 सांझा बाजार बनाए जा चुके हैं। विपणन और ब्रांडिंग के लिए ऑनलाइन तथा ऑफलाइन प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराए गए हैं। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत डिजिटल ग्राम बाजार और सांझा बाजार सेल्स पोर्टल शुरू किए गए हैं, जहां पंजीकरण कराकर कारीगर और स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद ऑनलाइन बेच सकते हैं। ऑनलाइन कारोबार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की गई है।

स्वयं सहायता समूहों से जुड़े 6 लाख से अधिक परिवार

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। इन समूहों के उत्पाद प्रदेशभर में अपनी पहचान बना रहे हैं और ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब तक 67,641 स्वयं सहायता समूहों से 6 लाख से अधिक परिवारों को जोड़ा जा चुका है। इन समूहों को रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। अब तक विभिन्न माध्यमों से कुल 596 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सामुदायिक निवेश निधि की राशि को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार रुपये कर दिया गया है। इससे स्वयं सहायता समूहों को अपने कार्यों का विस्तार करने और आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

सूरजकुंड मेला संस्कृति और अर्थव्यवस्था को जोड़ने का माध्यम

नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की धरती पर आयोजित सूरजकुंड शिल्प मेला, कुरुक्षेत्र का अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव और पिंजौर का आम उत्सव जैसे आयोजन देश-दुनिया के लोगों को जोड़ते हैं। ये आयोजन स्थानीय उत्पादकों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने, नए ग्राहकों से जुड़ने और अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेला भी इसी सांस्कृतिक और आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास है। इस तरह के आयोजनों से पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन मिलता है और स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार का विस्तार होता है। मुख्यमंत्री ने मेले में आने वाले लोगों से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मेले और उसके आसपास साफ-सफाई बनाए रखें, खरीदारी के लिए कपड़े का थैला साथ लाएं तथा भोजन और पानी की बर्बादी से बचें। उन्होंने मिट्टी के दीये और टिकाऊ सजावटी वस्तुओं को अपनाने तथा बच्चों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।

एनसीआर के लोगों से दिवाली मेले में खरीदारी करने की अपील

हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने दिल्ली-एनसीआर के लोगों से सूरजकुंड दिवाली मेले में पहुंचकर स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ व्यापार तथा पर्यटन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी उभरा है। मंत्री ने बताया कि इस वर्ष आयोजित सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में 20 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें 50 देशों के पर्यटक शामिल थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिवाली मेला भी धीरे-धीरे लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाएगा। डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि दिवाली मेले में 300 दुकानें लगाई गई हैं। दिल्ली-एनसीआर के लोग अगले चार दिनों तक यहां पहुंचकर खरीदारी कर सकते हैं। इससे स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन मिलने के साथ उनके उत्पादों को नया बाजार मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में प्रत्येक नागरिक और संस्थान की भूमिका है। सूरजकुंड जैसे आयोजन हरियाणा और भारत की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं।

राखीगढ़ी की प्राचीन सभ्यता का भी किया उल्लेख

पर्यटन मंत्री ने हिसार जिले की राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां खुदाई के माध्यम से प्राचीन सभ्यता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से राखीगढ़ी पहुंचकर इस ऐतिहासिक स्थल को देखने और प्राचीन जीवनशैली के बारे में जानने की अपील की। कार्यक्रम में फरीदाबाद की मेयर प्रवीन बत्रा जोशी, पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा, पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा की पत्नी रीटा शर्मा, पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल, प्रबंध निदेशक पार्थ गुप्ता, पंकज पूजन रामपाल, विपिन बैंसला, पूर्व विधायक नरेंद्र गुप्ता सहित प्रदेशभर से आए कारीगर, शिल्पकार, कलाकार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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Author: New India News Network

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