गुरुग्राम, 24 अक्टूबर। दिवाली का त्योहार सिर पर है, लेकिन गुरुग्राम के बाजारों में रौनक नजर नहीं आ रही। बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। त्योहारों के इस सीजन में जहां बाजारों में खरीदारों की भीड़ होनी चाहिए, वहीं दुकानदार ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। महंगाई के चलते लोग जरूरी सामान खरीदने से पहले भी कई बार सोचने को मजबूर हैं। इसका असर खरीदारी और कारोबार, दोनों पर दिखाई दे रहा है। आम आदमी की परेशानी केवल त्योहारों की खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल होता जा रहा है। खाने-पीने की वस्तुओं और खासकर सब्जियों के बढ़ते दामों ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है। गुरुग्राम की सब्जी मंडियों में सब्जियों की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती नजर आ रही हैं। ऐसे में लोग जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं।
सब्जियों के दाम आसमान पर, रसोई का बजट बिगड़ा
गुरुग्राम में सब्जियों के दामों पर नजर डालें तो आलू 35 से 50 रुपये प्रति किलो, टमाटर 50 से 60 रुपये प्रति किलो, मूली 50 रुपये प्रति किलो, गोभी 80 रुपये प्रति किलो, लौकी 40 रुपये प्रति किलो और कद्दू 40 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इन कीमतों के चलते आम परिवारों के लिए रोजाना सब्जियां खरीदना भी चुनौती बनता जा रहा है। महंगाई का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है। सीमित आमदनी वाले परिवार खर्च में कटौती करने को मजबूर हैं। कई परिवार दूध, लस्सी और चटनी जैसे साधारण खाद्य पदार्थों के सहारे गुजारा कर रहे हैं। कम आमदनी और बढ़ते खर्च के बीच परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
दुकानदार मायूस, खरीदार भी परेशान
दिवाली के मौके पर व्यापारियों को अच्छे कारोबार की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार बढ़ती महंगाई के चलते बाजारों में अपेक्षित खरीदारी नहीं दिखाई दे रही। दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, वहीं ग्राहक भी अपनी जरूरतों और बजट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गुरुग्राम जैसे महंगे शहर में रहने वाले उन लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, जो रोजाना कमाते हैं और उसी कमाई से अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों से गुरुग्राम आए लोगों के लिए भी बढ़ती महंगाई के बीच बचत करना कठिन होता जा रहा है। कमाई का बड़ा हिस्सा किराए, खाने-पीने और अन्य जरूरी खर्चों में निकल जाता है।
महंगाई पर नियंत्रण की मांग
लगातार बढ़ती महंगाई ने केंद्र और हरियाणा सरकार के सामने भी सवाल खड़े किए हैं। आम लोगों को उम्मीद है कि जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि उन्हें राहत मिल सके। दिवाली जैसे बड़े त्योहार से पहले बाजारों में रौनक की जगह मायूसी दिखाई देना चिंता का विषय है। महंगाई की मार से परेशान लोगों और व्यापारियों की स्थिति को देखते हुए अब यही सवाल उठ रहा है कि त्योहारों की खुशियां आम आदमी की पहुंच में कैसे रहेंगी। ऐसे हालात में ‘महंगाई डायन खाए जात है’ गीत की पंक्तियां एक बार फिर आम लोगों की परेशानी को बयां करती नजर आ रही हैं।





