दुबई में गूंजी देवभूमि की तान, जागर साम्राज्ञी हेमा नेगी करासी की प्रस्तुति पर झूम उठे प्रवासी उत्तराखंडी

बई में हेमा नेगी करासी का जलवा! जागर और पहाड़ी गीतों पर झूम उठे प्रवासी उत्तराखंडी

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दुबई (संयुक्त अरब अमीरात)। सात समंदर पार दुबई की धरती पर जब देवभूमि उत्तराखंड के पारंपरिक लोकगीतों की मधुर धुन गूंजी और ढोल-दमाऊ की थाप सुनाई दी, तो वहां मौजूद प्रवासी उत्तराखंडी अपनी संस्कृति के रंग में सराबोर हो उठे। संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोकगायिका और ‘जागर साम्राज्ञी’ के नाम से विख्यात हेमा नेगी करासी ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम में उत्तराखंडी लोकसंस्कृति, परंपराओं और संगीत की ऐसी झलक देखने को मिली, जिसने प्रवासियों को अपनी जन्मभूमि की याद दिला दी।

पारंपरिक वेशभूषा में मंच पर उतरीं हेमा नेगी करासी

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण प्रसिद्ध लोकगायिका हेमा नेगी करासी की प्रस्तुति रही। पारंपरिक पहाड़ी वेशभूषा घाघरा, अंगड़ी, नथ और आभूषणों से सजी हेमा नेगी करासी जैसे ही मंच पर पहुंचीं, दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपरा से जुड़े जागर, मांगल और थड़िया-चौंफला की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उनकी सुरीली आवाज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन ने पूरे सभागार में देवभूमि का सांस्कृतिक वातावरण बना दिया। जागर की आध्यात्मिक अनुभूति और लोकगीतों की मधुरता ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं थड़िया और चौंफला की प्रस्तुतियों पर प्रवासी उत्तराखंडी उत्साह के साथ झूमते नजर आए।

ललित मोहन जोशी और गजेंद्र राणा सहित कलाकारों ने बांधा समां

सांस्कृतिक कार्यक्रम में हेमा नेगी करासी के साथ उत्तराखंड के प्रसिद्ध कलाकार ललित मोहन जोशी, गजेंद्र राणा, श्वेता बिष्ट और चंद्र प्रकाश ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीतों और संगीत के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के दौरान गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकसंस्कृति की झलक ने प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी मिट्टी और परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

ढोल-दमाऊ की थाप पर झूम उठे प्रवासी

कार्यक्रम में जैसे ही उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल-दमाऊ की थाप गूंजी, सभागार का माहौल उत्साह से भर गया। अपनी जन्मभूमि से हजारों किलोमीटर दूर रह रहे उत्तराखंडी प्रवासियों के लिए यह आयोजन किसी सांस्कृतिक उत्सव से कम नहीं था। लोकगीतों की धुन पर दर्शक तालियां बजाते और कलाकारों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। हेमा नेगी करासी की प्रस्तुति ने विशेष रूप से दर्शकों को प्रभावित किया। उनके जागर गायन में उत्तराखंड की धार्मिक आस्था, लोकदेवताओं की परंपरा और पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान की झलक दिखाई दी।

विदेशों में भी जीवंत है उत्तराखंड की लोकसंस्कृति

आयोजकों ने बताया कि दुबई में इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य विदेशों में रहने वाले उत्तराखंडी समाज को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखना है। उन्होंने कहा कि रोजगार और व्यवसाय के सिलसिले में बड़ी संख्या में उत्तराखंड के लोग विदेशों में रह रहे हैं, लेकिन अपनी मातृभूमि और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनका लगाव आज भी बना हुआ है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने के साथ ही प्रवासी समाज के बीच आपसी एकता और भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।

दर्शकों ने की कलाकारों की जमकर सराहना

कार्यक्रम में उपस्थित प्रवासी उत्तराखंडी दर्शकों ने हेमा नेगी करासी सहित सभी कलाकारों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की। दर्शकों ने कहा कि विदेश की धरती पर अपने पहाड़ के लोकगीतों, पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखना एक विशेष अनुभव है। ऐसे कार्यक्रम उन्हें अपनी जन्मभूमि की याद दिलाने के साथ ही अपनी संस्कृति पर गर्व करने का अवसर प्रदान करते हैं।

सात समंदर पार उत्तराखंड की संस्कृति का परचम

उत्तराखंड की लोकसंस्कृति अपनी विशिष्ट पहचान, पारंपरिक वाद्ययंत्रों, जागर गायन और लोकनृत्यों के लिए जानी जाती है। जागर केवल लोकगायन की एक शैली नहीं, बल्कि उत्तराखंड की धार्मिक आस्थाओं, लोकदेवताओं और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हेमा नेगी करासी जैसी लोकगायिकाएं इन परंपराओं को देश-विदेश के मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

दुबई में आयोजित इस सांस्कृतिक समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि उत्तराखंड के लोग दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अपनी मातृभूमि, लोकगीतों और सांस्कृतिक जड़ों से उनका रिश्ता हमेशा जीवंत रहता है। देवभूमि की लोकधुनों से सजी यह शाम प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए यादगार बन गई।

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Author: New India News Network

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