गुरुग्राम, 30 अक्टूबर 2026। गुरुग्राम में लोन दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को साइबर अपराध थाना मानेसर की पुलिस टीम ने उत्तराखंड से गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर साइबर अपराधियों को बैंक खाता उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम जिस बैंक खाते में ट्रांसफर कराई गई थी, वह गिरफ्तार आरोपी अनमोल के नाम पर था। अनमोल ने अपना बैंक खाता अपने साथी शिवम को बेच दिया था, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया।
बैंक कर्मचारी बनकर किया संपर्क, लोन के नाम पर ठगे 1.95 लाख रुपये
गुरुग्राम पुलिस के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को एक व्यक्ति ने थाना साइबर अपराध मानेसर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि एक व्यक्ति ने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर उससे संपर्क किया और लोन उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। आरोपी ने लोन दिलाने की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न शुल्क जमा कराने के नाम पर शिकायतकर्ता से अलग-अलग बार में कुल 1,95,662 रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। रकम जमा कराने के बाद शिकायतकर्ता को अपने साथ धोखाधड़ी होने का पता चला। इसके बाद उसने साइबर अपराध थाना मानेसर में शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
गुरुग्राम पुलिस ने हरिद्वार से दो आरोपियों को दबोचा
मामले की जांच करते हुए थाना साइबर अपराध मानेसर की पुलिस टीम ने बैंक खाते और उससे जुड़े लेनदेन की जानकारी जुटाई। जांच के आधार पर पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवम और अनमोल के रूप में हुई है। दोनों आरोपी इंद्रा बस्ती, हरिद्वार, उत्तराखंड के रहने वाले हैं।
अनमोल के बैंक खाते में आई थी ठगी की रकम
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि शिकायतकर्ता से ठगी गई 1,95,662 रुपये की राशि जिस बैंक खाते में जमा कराई गई थी, वह आरोपी अनमोल के नाम पर था। पुलिस के अनुसार, अनमोल ने अपना बैंक खाता अपने साथी शिवम को बेच दिया था। इसके बाद इस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा कराने के लिए किया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस साइबर अपराध में बैंक खातों के इस्तेमाल और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
साइबर अपराध में बैंक खातों का इस्तेमाल गंभीर चुनौती
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी कई बार दूसरे व्यक्तियों के नाम पर खुले बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनके माध्यम से ठगी की रकम प्राप्त करने या आगे ट्रांसफर करने का काम किया जाता है। गुरुग्राम में सामने आए इस मामले में भी पुलिस के अनुसार, एक आरोपी के नाम पर खुले बैंक खाते को दूसरे आरोपी को बेचा गया था और बाद में उसका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने में हुआ।हालांकि, पुलिस की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोनों आरोपियों को बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले कितनी रकम मिली थी या इस मामले में अन्य कितने लोग शामिल हैं।
लोन के नाम पर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क
इस प्रकार की साइबर ठगी से बचने के लिए नागरिकों को लोन उपलब्ध कराने के नाम पर आने वाली अनजान कॉल और संदेशों से सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था से लोन लेने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट, शाखा या अधिकृत माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। अनजान व्यक्तियों के कहने पर प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज या अन्य शुल्क के नाम पर रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए।








