गुरुग्राम, 4 सितंबर। साइबर सिटी के नाम से देश-दुनिया में पहचान बनाने वाले गुरुग्राम में इन दिनों सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के कई इलाकों में जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं। सड़कों के किनारे, खाली प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा कचरा शहर की सफाई व्यवस्था की हकीकत बयां कर रहा है।
गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में जहां करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, वहीं बुनियादी सफाई व्यवस्था का इस तरह प्रभावित होना शहरवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। लोगों का सवाल है कि जब नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था के लिए निजी एजेंसियों को ठेके दिए गए हैं और इन एजेंसियों को सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया जाता है, तो फिर शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर क्यों दिखाई दे रहे हैं?
निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल

शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था के बीच निजी सफाई एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम द्वारा जिन एजेंसियों को अलग-अलग क्षेत्रों में सफाई और कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी दी गई है, उनकी निगरानी और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि एजेंसियों को निर्धारित राशि का भुगतान किया जा रहा है, तो उसके अनुरूप नियमित रूप से सफाई और कूड़ा उठाने का काम भी होना चाहिए। यदि कहीं कूड़ा कई दिनों तक पड़ा रहता है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सरकारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ी परेशानी
गुरुग्राम में सफाई व्यवस्था की मौजूदा स्थिति के बीच सरकारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। कर्मचारियों की मांगों और सरकार के बीच चल रहे विवाद का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर दिखाई देने की बात कही जा रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं, तब निजी एजेंसियों के पास सफाई व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी होने के बावजूद शहर के कई हिस्सों में कूड़ा जमा क्यों है?
करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी हालात क्यों नहीं सुधरे?
गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर भी है। नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था पर बड़ी राशि खर्च की जाती है। ऐसे में शहरवासियों को यह जानने का अधिकार है कि सफाई के नाम पर खर्च किए जा रहे सरकारी धन का वास्तविक असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है।
क्या निजी एजेंसियों के काम की नियमित निगरानी हो रही है? क्या एजेंसियों द्वारा तय मानकों के अनुसार काम किया जा रहा है? क्या कूड़ा उठाने की व्यवस्था की नियमित जांच होती है? और यदि एजेंसियां अपना काम सही तरीके से नहीं कर रही हैं तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
इन सवालों का जवाब नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए।
राव इंद्रजीत सिंह की नाराजगी का मुद्दा भी चर्चा में

गुरुग्राम की स्थानीय समस्याओं को लेकर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह कई मौकों पर अपनी ही पार्टी की सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था की बदहाली के बीच उनकी नाराजगी का मुद्दा भी राजनीतिक चर्चाओं में आ सकता है।
हालांकि, सफाई व्यवस्था की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदारी तय करना प्रशासन और नगर निगम का विषय है। जनता का मुख्य सवाल यही है कि आखिर शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से कौन सुनिश्चित करेगा।
‘गुड़गांव को वास्तव में लूटा जा रहा है’ जैसे आरोप
शहर की मौजूदा स्थिति को लेकर लोगों में आक्रोश है। आलोचकों का आरोप है कि गुरुग्राम से लगातार भारी मात्रा में राजस्व और सरकारी धन खर्च होने के बावजूद शहर को बुनियादी सुविधाओं के मामले में अपेक्षित स्तर की व्यवस्था नहीं मिल रही।
लोगों का कहना है कि गुरुग्राम को देश के आधुनिक शहरों में गिना जाता है, लेकिन यदि मुख्य सड़कों और रिहायशी इलाकों के आसपास कूड़े के ढेर दिखाई दें, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
‘तीसरी बार सरकार की चाबी किसे सौंपी?’
गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। जनता के बीच यह चर्चा है कि हरियाणा में तीसरी बार सरकार बनने के बावजूद शहर की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि सरकार और नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद यदि सफाई व्यवस्था लगातार प्रभावित होती है, तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी है?
जनता चाहती है जवाबदेही

गुरुग्राम के लोगों की मांग है कि नगर निगम सफाई व्यवस्था की जमीनी स्थिति की तत्काल समीक्षा करे। जिन निजी एजेंसियों को सफाई का ठेका दिया गया है, उनके काम का ऑडिट और नियमित निरीक्षण किया जाए। जहां लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
शहरवासियों का कहना है कि उन्हें कागजों पर सफाई व्यवस्था के आंकड़े नहीं, बल्कि जमीन पर साफ सड़कें, नियमित कूड़ा उठान और स्वच्छ सार्वजनिक स्थान चाहिए।
गुरुग्राम की पहचान देश के प्रमुख कॉरपोरेट और आईटी हब के रूप में है। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था का खराब होना न केवल स्थानीय लोगों के लिए परेशानी है, बल्कि इससे शहर की छवि भी प्रभावित होती है।
अब देखना होगा कि नगर निगम और हरियाणा सरकार इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सफाई के नाम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये का वास्तविक लाभ गुरुग्राम की जनता तक कब पहुंचता है।







