नारनौल, 23 अक्टूबर। एडवोकेट एवं पूर्व नगर पार्षद प्रमोद तरेड़िया ने रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा के हरियाणा पर 5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के दावे को तथ्यों से परे बताया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के बजट 2026-27 के अनुसार मार्च 2027 तक प्रदेश का कुल बकाया ऋण लगभग 3.91 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 25.78 प्रतिशत है। प्रमोद तरेड़िया ने कहा कि विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन जनता के सामने सही और पूरे आंकड़े रखने चाहिए। उनके अनुसार, 5 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा बजट दस्तावेजों में नहीं है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मार्च 2014 में ही हरियाणा की कुल बकाया देनदारियां लगभग 79,600 करोड़ रुपये थीं।
कांग्रेस शासन के दौरान तीन गुना से अधिक बढ़ा कर्ज
तरेड़िया ने कांग्रेस शासन के नौ वर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि मार्च 2005 में प्रदेश की कुल देनदारियां लगभग 24,900 करोड़ रुपये थीं, जो मार्च 2014 तक बढ़कर लगभग 79,600 करोड़ रुपये हो गईं। इस अवधि में कर्ज तीन गुना से अधिक बढ़ा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005-06 से 2007-08 तक प्रदेश का राजस्व खाता अधिशेष में था, लेकिन 2008-09 से लगातार घाटे में चला गया। वर्ष 2013-14 में राजस्व घाटा 3,875 करोड़ रुपये था, जबकि परिसंपत्तियों के निर्माण पर पूंजीगत परिव्यय केवल 3,935 करोड़ रुपये रहा।
विकास कार्यों पर खर्च हो रहा है बजट
प्रमोद तरेड़िया ने कहा कि बढ़ती अर्थव्यवस्था में कर्ज की राशि बढ़ना स्वाभाविक है। असली सवाल यह है कि ऋण जीएसडीपी के अनुपात में निर्धारित सीमा के भीतर है या नहीं और उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बजट 2026-27 में पूंजीगत परिव्यय 21,757 करोड़ रुपये रखा गया है, जो वर्ष 2013-14 की तुलना में साढ़े पांच गुना से अधिक है। इस राशि से सड़क, पुल, अस्पताल, सिंचाई और शहरी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजकोषीय घाटा वर्ष 2014-15 में जीएसडीपी का 2.88 प्रतिशत था, जिसे वर्ष 2026-27 में 2.65 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है। वहीं, राजस्व घाटा वर्ष 2024-25 के 1.59 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2026-27 में 0.87 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
वित्तीय अनुशासन के साथ विकास पर जोर
तरेड़िया ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर स्वस्थ बहस होनी चाहिए, लेकिन यह बहस तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए, न कि बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए आंकड़ों पर।







