IAS डी. सुरेश समेत 9 पर FIR, HSVP प्लॉट ट्रांसफर में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप

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रिटायरमेंट के दिन IAS डी. सुरेश समेत 9 पर FIR, HSVP प्लॉट ट्रांसफर में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप

गुरुग्राम। हरियाणा के 1995 बैच के IAS अधिकारी डी. सुरेश कुमार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने FIR दर्ज की है। मामला गुरुग्राम के सेक्टर-23/23ए स्थित HSVP के 500.64 वर्ग गज के प्लॉट नंबर 4377 के कथित अवैध ट्रांसफर से जुड़ा है। करीब सात साल चली जांच के बाद ACB ने तत्कालीन HSVP मुख्य प्रशासक डी. सुरेश कुमार, पूर्व संपदा अधिकारी मुकेश कुमार समेत कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया है।आरोप है कि प्लॉट के मामले में नियमों और रिकॉर्ड के साथ कथित तौर पर हेरफेर कर सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। जांच के अनुसार, वर्ष 2019 में इस प्लॉट की कलेक्टर रेट के आधार पर कीमत करीब 1.75 करोड़ रुपये थी, जबकि इसका वास्तविक बाजार मूल्य करीब 3.5 करोड़ रुपये बताया गया। इसके बावजूद इसकी Conveyance Deed में महज 6.71 लाख रुपये की राशि दर्शाई गई।

1988 में हुआ था प्लॉट का अलॉटमेंट

मामला प्लॉट नंबर 4377 से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1988 में एसके खोसला की फर्म को करीब 6.74 लाख रुपये में अलॉट किया गया था। अलॉटमेंट के समय प्लॉट की कीमत की केवल 10 फीसदी राशि जमा की गई थी। बाद में बकाया राशि जमा नहीं होने के कारण हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण यानी HSVP ने 8 अप्रैल 2002 को प्लॉट का अलॉटमेंट रद्द कर उसे वापस ले लिया थाACB की जांच के मुताबिक, अलॉटमेंट रद्द होने के बावजूद वर्ष 2003 में इस प्लॉट की GPA अभय सहारण के नाम कराई गई। इसके बाद संपत्ति को सतवीर सिंह मलिक के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।

दूसरे प्लॉट के मामले से जोड़ने का आरोप

जांच में प्लॉट नंबर 4377 के साथ एसके खोसला के एक अन्य प्लॉट नंबर 4358 का मामला भी सामने आया। ACB के अनुसार, प्लॉट नंबर 4358 की पूरी राशि समय पर जमा की गई थी। रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी के कारण यह प्लॉट भी रद्द हुआ था, लेकिन बाद में Consumer Forum के आदेश के आधार पर इसे बहाल कर दिया गया।आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने प्लॉट नंबर 4377 और 4358 के मामलों को एक जैसा दिखाया, जबकि दोनों मामलों में महत्वपूर्ण अंतर था। जांच के अनुसार, प्लॉट नंबर 4377 को बकाया राशि जमा नहीं होने के कारण रद्द किया गया था।

अधिकारियों पर गलत नोट तैयार करने का आरोप

ACB की जांच में क्लर्क हनुमान सिंह और सहायक कृष्ण कुमार पर मामले से संबंधित गलत नोट तैयार करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि इस नोट को तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार ने मंजूरी दी और आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा।इसके बाद 1 मार्च 2019 को तत्कालीन HSVP मुख्य प्रशासक डी. सुरेश कुमार ने दोनों मामलों को समान मानते हुए रद्द किए गए प्लॉट की जब्ती को निरस्त कर दिया। ACB ने इसी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच की।

फरवरी 2026 में मिली थी मुकदमा चलाने की मंजूरी

मामले में विजिलेंस जांच की सिफारिश के बाद मुख्य सचिव की ओर से फरवरी 2026 में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई। इसके बाद अगस्त 2026 में ACB पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। मामले की विस्तृत जांच DSP स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है।ACB के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। FIR में कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है।

हाईकोर्ट से अंतरिम राहत

इस मामले में IAS डी. सुरेश कुमार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली हुई है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, यदि जांच के दौरान पुलिस या ACB को उनकी कस्टडी की आवश्यकता पड़ती है, तो उन्हें कम से कम सात दिन पहले नोटिस देना होगा।मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को होनी है।

31 अगस्त को रिटायर हुए डी. सुरेश

डी. सुरेश कुमार हरियाणा कैडर के 1995 बैच के IAS अधिकारी हैं। अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने शहरी विकास और शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वह हरियाणा सरकार में प्रधान सचिव, मत्स्य विभाग के पद पर भी रह चुके हैं।31 अगस्त 2026 को उनके रिटायरमेंट के दिन ही यह FIR चर्चा में आई, जिसमें उन पर HSVP के प्लॉट से जुड़े फैसले में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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Author: New India News Network

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