
हालांकि, ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और अन्य डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। एटीएम सेवाएं भी उपलब्ध रहने की उम्मीद है, हालांकि कुछ स्थानों पर नकदी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।बैंक यूनियनों का कहना है कि पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। मार्च 2024 में हुए 12वें बाइपार्टाइट सेटेलमेंट के दौरान इस मुद्दे पर सहमति बनी थी, लेकिन इसे लागू करने के लिए जरूरी सरकारी अधिसूचना अब तक जारी नहीं हुई है।

यूनियनों की मांग केवल पांच दिन के कार्य सप्ताह तक सीमित नहीं है। वे परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI से जुड़े मुद्दों और अन्य लंबित मांगों के समाधान की भी मांग कर रहे हैं।हड़ताल से पहले सरकार, बैंक प्रबंधन और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन पांच दिन की बैंकिंग को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद UFBU ने 11 सितंबर की हड़ताल जारी रखने का फैसला किया।

खास बात यह है कि अगर मांगों पर जल्द समाधान नहीं निकला तो बैंक यूनियनों ने आगे भी आंदोलन की चेतावनी दी है। 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया गया है। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो अक्टूबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बैंक कर्मचारी लंबे समय से पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग कर रहे हैं, तो आखिर फैसला कब होगा?और अगर यह विवाद जल्द खत्म नहीं हुआ तो क्या इसका खामियाजा आम बैंक ग्राहकों और कारोबारियों को ही भुगतना पड़ेगा?








