गुरुग्राम में अफसरशाही का मैं बड़ा,तो मैं बड़ा वाला खेल,तालमेल की कमी में पिस रही जनता

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गुरुग्राम ,10 सितम्बर / गुरुग्राम में अफसरशाही का मैं बड़ा, तो मैं बड़ा वाला खेल जनता की परेशानी बढ़ाता नजर आ रहा है। शहर को संभालने वाले अलग-अलग विभागों के अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय की कमी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अधिकारी अपने अपने विभाग की जिम्मेदारी और अधिकार क्षेत्र में उलझे हैं, जबकि जनता बिजली, पानी, सड़क, सीवर और साफ-सफाई जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है।सबसे बड़ा सवाल अधिकारियों की प्लानिंग पर उठ रहा है। शहर में कहीं सड़क बनती है तो कुछ समय बाद उसी सड़क को किसी दूसरे काम के लिए खोद दिया जाता है। कहीं सीवर लाइन के लिए गड्ढा खोदा जाता है, कहीं पानी की पाइपलाइन के लिए सड़क काटी जाती है और कहीं केबल या अन्य काम के बाद रास्ते को अधूरा छोड़ दिया जाता है। यानी काम करने से पहले विभागों के बीच तालमेल कितना है, यह सवाल लगातार खड़ा होता है।

हैरानी यह है कि गड्ढा खोदने की जल्दी तो दिखाई देती है, लेकिन उसे भरने की जल्दी नजर नहीं आती। काम पूरा होने के बाद सड़क कब ठीक होगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब लोगों को नहीं मिलता। कई बार जनता को खुद शिकायत करके अधिकारियों को याद दिलाना पड़ता है कि सड़क या गड्ढा ठीक करना भी उसी काम का हिस्सा है।अगर किसी सड़क पर सीवर, पानी, बिजली, केबल या अन्य विभागों का काम होना है, तो सभी विभाग पहले से आपस में तालमेल क्यों नहीं करते? क्या एक ही सड़क को बार-बार खोदने के बजाय सभी जरूरी काम एक साथ नहीं किए जा सकते? इस तरह की अव्यवस्था से जनता को परेशानी के साथ सरकारी धन और संसाधनों पर भी सवाल खड़े होते हैं।

दूसरी तरफ, शिकायत लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचने वाला आम आदमी भी परेशान है। एक विभाग से दूसरे विभाग तक भेजे जाने के बाद भी कई बार उसे समाधान नहीं मिलता। समस्या जनता की होती है, लेकिन जिम्मेदारी लेने के लिए विभाग आगे नहीं आता।यह स्थिति मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के लिए भी बड़ा सवाल है। सरकार की ओर से अधिकारियों को जनता की समस्याओं के समाधान और बेहतर प्रशासन के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन गुरुग्राम में जमीन पर तस्वीर अलग नजर आती है।सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री तक गुरुग्राम की सही जमीनी तस्वीर पहुंच रही है? क्या अधिकारी अपनी कमियों और विभागों के बीच तालमेल की स्थिति से सरकार को अवगत करा रहे हैं, या फिर कागजों पर सब कुछ ठीक दिखाकर मुख्यमंत्री की आंखों में धूल झोंकी जा रही है?गुरुग्राम की जनता को अधिकारियों की मैं बड़ा तो मैं बड़ा वाली लड़ाई से कोई मतलब नहीं। उसे चाहिए समय पर बिजली-पानी, बेहतर सड़कें और शिकायतों का समाधान। अब सवाल है अधिकारियों की खींचतान पर लगाम कौन लगाएगा और जवाबदेही किसकी तय होगी?

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Author: New India News Network

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