सेना के बैंड की धुन और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों के बीच बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट

सेना के बैंड की धुन और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों के बीच बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट

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चमोली। सेना के बैंड की मधुर धुनें, शबद-कीर्तन की गूंज और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों के बीच सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। अंतिम अरदास के दौरान पूरा धाम भक्तिमय माहौल में सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के समक्ष नतमस्तक होकर सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। इसी के साथ पौराणिक श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी विधि-विधान से बंद कर दिए गए और इस वर्ष की हेमकुंड साहिब यात्रा का समापन हो गया।

3.84 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

23 मई से शुरू हुई हेमकुंड साहिब यात्रा में इस वर्ष 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम पहुंचकर मत्था टेका। कपाट बंद होने के अवसर पर गोविंद धाम यानी घांघरिया से रागी जत्थे के साथ हजारों श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंचे। इस दौरान पाकिस्तान से आया 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी अंतिम अरदास का साक्षी बना। बर्फ से ढकी सप्तश्रृंग घाटी के बीच गूंजते शबद-कीर्तन और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों ने माहौल को भावुक और आध्यात्मिक बना दिया। गुरु महाराज के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस अवसर पर देखने को मिली।

अंतिम अरदास के साथ संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान

हेमकुंड साहिब में कपाट बंद होने की प्रक्रिया सुबह सुखमणी साहिब के पाठ के साथ शुरू हुई। इसके बाद शबद-कीर्तन हुआ और दोपहर में यात्रा की अंतिम अरदास की गई। हुक्मनामा लेने के बाद गुरु ग्रंथ साहिब को पंज प्यारों की अगुवाई में सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच दीवान हॉल से सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया। सभी धार्मिक परंपराओं का विधि-विधान से निर्वहन किया गया। इसके बाद हेमकुंड साहिब और श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। अंतिम अरदास में शामिल श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए सुख-शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना की।

बर्फीले रास्तों पर पुलिस और एसडीआरएफ ने संभाली जिम्मेदारी

हेमकुंड साहिब की यात्रा के दौरान दुर्गम पहाड़ी रास्तों और बदलते मौसम के बीच श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती रही। बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और फिसलन भरे रास्तों के बावजूद चमोली पुलिस और एसडीआरएफ के जवान मुस्तैदी से तैनात रहे। जवानों ने कठिन रास्तों पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवाजाही में मदद की और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई। पुलिसकर्मियों और एसडीआरएफ के जवानों ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए यात्रियों को राहत पहुंचाई। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार के निर्देशन में यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही और अन्य व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की गई। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में जवानों की तत्परता और सहयोग से श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिली।

गुरुद्वारा प्रबंधन ने पुलिस के सेवाभाव की सराहना की

यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कुशल प्रबंधन के लिए गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट ने चमोली पुलिस के प्रयासों की सराहना की। ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने प्रभारी निरीक्षक गोविंदघाट चित्रगुप्त सिंह तथा चौकी प्रभारी घांघरिया अमनदीप सिंह की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने यात्रा के दौरान पुलिसकर्मियों के समर्पण, मुस्तैदी और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधन ट्रस्ट के मैनेजर मोनू सिंह, ग्रंथी हामिद सिंह सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने भी चमोली पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों के सेवाभाव की सराहना की।

आस्था, श्रद्धा और सेवा के साथ यात्रा का समापन

हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की यात्रा संपन्न हो गई। एक ओर अंतिम अरदास और गुरु ग्रंथ साहिब को सचखंड साहिब में सुशोभित किए जाने के दौरान श्रद्धालु भावुक नजर आए, तो दूसरी ओर कठिन परिस्थितियों में यात्रियों की मदद के लिए तैनात पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों की सेवा की भी सराहना हुई। 3.84 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आस्था, धार्मिक परंपराओं और सुरक्षा कर्मियों के सेवाभाव के साथ हेमकुंड साहिब यात्रा का समापन हुआ। अब पवित्र धाम में शीतकालीन विराम रहेगा और श्रद्धालुओं को अगले यात्रा सीजन का इंतजार रहेगा।

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Author: New India News Network

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