श्री बदरीनाथ धाम, 21 अक्टूबर। विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट इस यात्रा वर्ष सोमवार, 16 नवंबर को रात 9 बजकर 37 मिनट पर कर्क लग्न में शीतकाल के लिए बंद होंगे। कपाट बंद होने से पहले 12 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू होंगी। वहीं, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने विजयदशमी के अवसर पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धामों के कपाट बंद होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देश में शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित किया जाएगा।विजयदशमी के अवसर पर श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर में आयोजित भव्य समारोह में कपाट बंद होने की तिथि की विधिवत घोषणा की गई। इस दौरान बदरीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने कपाट बंद होने की तिथि घोषित की। इससे पहले धर्माधिकारी आचार्य स्वयंवर सेमवाल और वेदपाठी डॉ. रवीन्द्र भट्ट तथा आचार्य वाणी विलास डिमरी ने पूजा-अर्चना और पंचांग गणना के बाद तिथि निर्धारित की। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि कपाट बंद होने से पहले श्रद्धालु बड़ी संख्या में श्री बदरीनाथ, श्री केदारनाथ और अन्य संबंधित मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी शीतकालीन यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं को देवभूमि के धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर मिलेगा। बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने भी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने यात्रा के सफल संचालन में सहयोग देने वाले सभी विभागों और संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

12 नवंबर से शुरू होंगी पंच पूजाएं
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार, बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले पंच पूजाओं का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
- 12 नवंबर, गुरुवार: भगवान गणेश का पूजन होगा।
- 13 नवंबर, शुक्रवार: आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे।
- 14 नवंबर, शनिवार: खड्ग-पुस्तक पूजन के साथ वेद ऋचाओं का वाचन बंद होगा।
- 15 नवंबर, रविवार: माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा और भगवान बदरीविशाल के दरबार में आने का निमंत्रण दिया जाएगा।
- 16 नवंबर, सोमवार: माता लक्ष्मी गर्भगृह में विराजमान होंगी तथा श्री कुबेर और श्री उद्धव जी मंदिर परिसर में आएंगे। इसी दिन रात 9 बजकर 37 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे।
शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होंगी देव डोलियां
कपाट बंद होने के अगले दिन, 17 नवंबर को सुबह श्री उद्धव जी और श्री कुबेर जी की डोलियां योग बदरी, पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेंगी। शीतकाल में यहीं उनकी पूजा-अर्चना होगी। श्री गरुड़ जी और आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी ज्योतिर्मठ स्थित श्री नृसिंह मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। रावल और नायब रावल आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ योग बदरी, पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे। इसके बाद 18 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी श्री नृसिंह मंदिर, ज्योतिर्मठ में विराजमान होगी। इसके साथ ही वर्ष 2026 की श्री बदरीनाथ यात्रा का समापन हो जाएगा।
अन्य धामों के कपाट बंद होने की तिथियां भी घोषित
इस यात्रा वर्ष श्री केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को भैयादूज के अवसर पर सुबह 8:30 बजे बंद होंगे। श्री यमुनोत्री धाम के कपाट भी 11 नवंबर को बंद होंगे, जबकि श्री गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा के अवसर पर बंद किए जाएंगे। संबंधित मंदिर समितियों ने कपाट बंद होने की तिथियों और समय की घोषणा कर दी है।
भंडार व्यवस्था के लिए पगड़ी भेंट

विजयदशमी के अवसर पर बीकेटीसी ने यात्रा वर्ष 2027 के लिए श्री बदरीनाथ धाम की भंडार व्यवस्था के संचालन हेतु पगड़ी भेंट की। इस वर्ष मेहता थोक से उमेश भट्ट और शिवम मेहता तथा कमदी-भंडारी थोक से महेंद्र भंडारी और जगदीश पंवार को पगड़ी भेंट की गई। इससे पहले मंदिर परिसर में रावल, धर्माधिकारी, वेदपाठियों और आचार्यों की उपस्थिति में नवरात्रि एवं उर्वशी माता की पूजा-अर्चना का समापन हवन-यज्ञ के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लिया। समारोह में बीकेटीसी के पदाधिकारी, पूर्व पदाधिकारी, मंदिर अधिकारी, कर्मचारी, तीर्थ पुरोहित, विभिन्न पंचायतों और हक-हकूकधारी संगठनों के प्रतिनिधि तथा सैकड़ों तीर्थयात्री उपस्थित रहे।








