नई दिल्ली, 30 अक्टूबर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित विशाल जनसभा से पहले हरियाणा कांग्रेस के नेताओं के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि हरियाणा से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दिल्ली पहुंचाने के लिए वाहनों, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च आखिर कौन उठाएगा? पार्टी के नेता सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में खर्च की जिम्मेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
रैली में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी, लेकिन खर्च पर असमंजस
कांग्रेस नेतृत्व की ओर से दिल्ली की प्रस्तावित रैली में बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने के लिए हरियाणा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सक्रिय होने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हरियाणा में कांग्रेस पिछले 12 वर्षों से सत्ता से बाहर है, जबकि केंद्र में भी पार्टी लंबे समय से सरकार में नहीं है। ऐसे में पार्टी संगठन के सामने बड़ी संख्या में लोगों को दिल्ली पहुंचाने के लिए संसाधन जुटाने की चुनौती है। राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल उठ रहा है कि हजारों कार्यकर्ताओं के परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च पार्टी संगठन उठाएगा या इसकी जिम्मेदारी अलग-अलग नेताओं को निभानी होगी।
हुड्डा की बैठक के बाद नेताओं में चर्चा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाल ही में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। बैठक में दिल्ली की रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बताया जा रहा है कि बैठक में विभिन्न नेताओं और पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।हालांकि, बैठक के बाद कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच रैली के खर्च को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई है। सवाल उठाया जा रहा है कि बड़ी संख्या में बसों और अन्य वाहनों की व्यवस्था के लिए आर्थिक संसाधन कहां से आएंगे।
भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा की भूमिका अहम
पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल की ओर से हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को प्रदेश से बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा परिवार का व्यापक राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में दिल्ली की प्रस्तावित रैली में हरियाणा से कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर दोनों नेताओं की संगठनात्मक भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
दक्षिण हरियाणा में कांग्रेस के सामने अलग चुनौती
दक्षिण हरियाणा के गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नूंह और आसपास के जिलों में भी कांग्रेस नेताओं की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि दक्षिण हरियाणा में बड़े स्तर पर कार्यकर्ताओं को जुटाने और उनके दिल्ली पहुंचने की व्यवस्था करने के लिए मजबूत स्थानीय संगठन तथा संसाधनों की आवश्यकता होगी। हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह की ओर से भी विभिन्न नेताओं और पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके कुछ नेताओं की सक्रियता को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठाए जा रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लाखों की भीड़ का दावा, खर्च का हिसाब अब भी सवाल
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि हरियाणा से लाखों लोग रैली में पहुंचेंगे। दिल्ली में सांसद दीपेंद्र हुड्डा के आवास पर हुई बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, प्रदेश प्रभारी संजय दत्त सहित वरिष्ठ नेताओं ने तैयारियों की समीक्षा की।लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों को दिल्ली पहुंचाने के लिए बसों, निजी वाहनों, ईंधन और अन्य व्यवस्थाओं पर कितना खर्च आएगा तथा यह खर्च कौन उठाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
पूर्व मंत्रियों और चुनाव लड़ चुके नेताओं की सक्रियता पर नजर
हरियाणा कांग्रेस के सामने एक चुनौती उन नेताओं को सक्रिय करने की भी है, जो पूर्व में मंत्री, विधायक या चुनावी उम्मीदवार रह चुके हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि रैली में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी मिलने के बाद इन नेताओं की संगठनात्मक सक्रियता की भी परीक्षा होगी। हालांकि, किसी विशेष नेता द्वारा खर्च उठाने से इनकार करने या रैली की तैयारियों से दूरी बनाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एक नवंबर को साफ होगी हरियाणा कांग्रेस की तैयारी की तस्वीर
दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक प्रस्तावित रैली के लिए पुलिस ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी शर्तें निर्धारित की हैं। आयोजकों से बसों और अन्य वाहनों की जानकारी भी मांगी गई है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से किए जा रहे लाखों लोगों की भागीदारी के दावे कितने पूरे होते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि दक्षिण हरियाणा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने में पार्टी संगठन और स्थानीय नेता कितने सफल रहते हैं। फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि राहुल गांधी की रैली में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी तो नेताओं को मिल गई, लेकिन उसका खर्च आखिर कौन उठाएगा?







