देहरादून, 3 नवंबर (न्यू इंडिया न्यूज नेटवर्क)। उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले चार दिनों से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। उपनल के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर काम बंद कर दिया था। इसका सीधा असर अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर पड़ा। वार्डों में गंदगी जमा होने लगी, शौचालयों की स्थिति खराब हो गई और अस्पताल परिसर में बदबू फैलने लगी। हालात ऐसे हो गए कि मरीजों के तीमारदारों को खुद झाड़ू उठाकर सफाई करनी पड़ी। चार दिन तक चली इस परेशानी के बाद निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना कर्मचारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने उनकी समस्याएं सुनीं और मांगों पर बातचीत की। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त करने और काम पर लौटने का फैसला लिया। उनके काम पर लौटते ही अस्पताल में सफाई व्यवस्था दोबारा शुरू हो गई।
मरीजों के लिए इलाज के साथ सफाई भी बनी चुनौती
दून अस्पताल सिर्फ देहरादून ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। यहां रोजाना दो हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। गढ़वाल और कुमाऊं के दूरदराज के क्षेत्रों से भी गंभीर मरीज इलाज के लिए यहां आते हैं।ऐसे अस्पताल में सफाई व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। अस्पताल के वार्ड, शौचालय, गलियारे और इमरजेंसी जैसे संवेदनशील स्थानों पर नियमित सफाई जरूरी होती है। लेकिन सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते चार दिनों तक व्यवस्था प्रभावित रही।अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह गंदगी और बदबू की शिकायतें सामने आईं। मरीजों के तीमारदारों को खुद सफाई करनी पड़ी, ताकि उनके परिजनों को गंदगी के बीच न रहना पड़े।
आखिर क्यों हड़ताल पर गए थे उपनल कर्मचारी?
दून अस्पताल में सफाई का काम करने वाले कर्मचारी उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड यानी उपनल के माध्यम से तैनात हैं। कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की थी। उनकी शिकायतें वेतन, भुगतान, काम की शर्तों, छुट्टी और कर्मचारियों के साथ व्यवहार से जुड़ी थीं। कर्मचारियों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को उठा रहे थे, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें काम बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कर्मचारियों की सभी मांगों और उन पर प्रशासन की ओर से लिए गए अंतिम निर्णय का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
चार दिनों में कैसे बिगड़ी अस्पताल की व्यवस्था?
पहला दिन: उपनल सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी और काम बंद कर दिया। शुरुआत में अस्पताल प्रशासन को उम्मीद थी कि बातचीत से मामला जल्द सुलझ जाएगा। दूसरा दिन: सफाई प्रभावित होने का असर अस्पताल के वार्डों और शौचालयों में दिखाई देने लगा। मरीजों के परिजनों ने गंदगी को लेकर शिकायतें शुरू कर दीं। तीसरा दिन: हालात और खराब हुए। कई जगह बदबू की समस्या सामने आई। मरीजों के तीमारदारों को खुद सफाई करनी पड़ी। अस्पताल में भर्ती लोगों के लिए इलाज के साथ साफ-सफाई भी बड़ी परेशानी बन गई। चौथा दिन: मामला उच्च स्तर तक पहुंचा। निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना खुद कर्मचारियों के बीच पहुंचे। बातचीत हुई और कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया।
डॉ. आशुतोष सयाना की पहल बनी टर्निंग पॉइंट
चार दिनों से जारी हड़ताल को समाप्त कराने में निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना की पहल अहम रही। वे खुद कर्मचारियों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। कर्मचारियों ने अपनी मांगें उनके सामने रखीं। डॉ. सयाना ने समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और समाधान की दिशा में कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने काम पर लौटने का निर्णय लिया। इस बातचीत के बाद अस्पताल में सफाई का काम फिर से शुरू हो गया। चार दिनों से प्रभावित व्यवस्था को सामान्य करने की चुनौती अब अस्पताल प्रशासन के सामने है।
सफाई कर्मचारियों के बिना अस्पताल की व्यवस्था अधूरी
अस्पताल में डॉक्टर और नर्स मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी संभालते हैं, लेकिन संक्रमण नियंत्रण और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सफाई कर्मचारियों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। वार्डों की सफाई, शौचालयों की देखभाल, कचरे का निस्तारण और अस्पताल परिसर को स्वच्छ रखना उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में कर्मचारियों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं होने पर इसका असर सीधे मरीजों और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
अब आश्वासन पर अमल का इंतजार
हड़ताल समाप्त होने से अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिली है। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारियों की मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। चार दिनों की हड़ताल ने यह भी दिखाया कि अस्पताल की सफाई व्यवस्था किसी एक कर्मचारी वर्ग के बिना कितनी प्रभावित हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा न हो। फिलहाल डॉ. आशुतोष सयाना की पहल के बाद कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। अब कर्मचारियों को अपने मुद्दों पर ठोस कार्रवाई का इंतजार है, वहीं मरीजों को उम्मीद है कि दून अस्पताल की सफाई व्यवस्था जल्द पूरी तरह पटरी पर लौटेगी।








