गुरुग्राम, 21 अगस्त- गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सैनी के काफिले को काले झंडे दिखाने के मामले में पुलिस पर भी गाज गिरी है। मुख्यमंत्री के बेहद करीब कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पहुंचने और काफिले के सामने प्रदर्शन करने को पुलिस ने गंभीर सुरक्षा चूक माना है। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर ने कार्रवाई करते हुए सिविल लाइंस थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही दो DCP को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इंटेलिजेंस इंचार्ज के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
परीक्षा परिणाम में देरी को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए।
मामला शुक्रवार का है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरुग्राम में जिला जनसंपर्क एवं शिकायत निवारण समिति की बैठक में शामिल होने के बाद गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में चौपाल कार्यक्रम और Gen-H Startup Summit में जा रहे थे। इसी दौरान कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डावर और ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन यादव के नेतृत्व में 15 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने काफिले के सामने पहुंचकर काले झंडे लहराए और ‘गो बैक’ के नारे लगाए।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि गुरुग्राम में जलभराव, टूटी सड़कें, सीवरेज और सफाई जैसी समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध किया जा रहा है। इसके अलावा गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के छात्रों की समस्याओं और परीक्षा परिणाम में देरी को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए।
दो DCP से जवाब मांगा गया है।
लेकिन प्रदर्शनकारियों का मुख्यमंत्री के काफिले के इतने करीब पहुंच जाना पुलिस के लिए बड़ा सवाल बन गया। इसके बाद पुलिस ने 8 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ VIP सुरक्षा व्यवस्था में बाधा डालने, सरकारी काम में रुकावट डालने और काफिला रोकने की कोशिश से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया गया।इस मामले में कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डावर और ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन यादव को भी आरोपी बनाया गया है, हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
अब दूसरी तरफ पुलिस विभाग में भी जवाबदेही तय की जा रही है। दो DCP से जवाब मांगा गया है।चूक को
लेकर पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई।
यानी काले झंडों का यह विरोध अब दो तरफा कार्रवाई में बदल गया है—एक तरफ प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की सुरक्षा में चूक को लेकर पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि मुख्यमंत्री के काफिले की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई और प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरे को पार कर काफिले के इतने करीब कैसे पहुंच गए? पुलिस की विभागीय जांच से इसकी पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।








