देहरादून। उत्तराखंड में सड़कों की खराब स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सड़क मार्ग से प्रदेश का दौरा करने और सड़कों की गुणवत्ता की जांच करने की खबर सामने आई है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सड़कों की स्थिति खराब मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बरसात के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और गड्ढों को भरने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर गड्ढों और क्षतिग्रस्त मार्गों की शिकायतें सामने आने के बीच सड़क मरम्मत का मुद्दा चर्चा में है। देहरादून से लेकर कुमाऊं और गढ़वाल के कई क्षेत्रों में खराब सड़कों के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होने की बात कही गई है। चारधाम यात्रा मार्गों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
सड़कों की गुणवत्ता पर होगी निगरानी
दिए गए विवरण के मुताबिक, बरसात के बाद लंबित मरम्मत कार्यों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया है। पैचवर्क और गड्ढामुक्त सड़क अभियान की प्रगति का आकलन केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर सड़क की स्थिति देखकर किए जाने की बात कही गई है। प्रस्तावित रणनीति के तहत मुख्यमंत्री अलग-अलग जिलों में सड़क मार्ग से निरीक्षण कर सकते हैं। इसका उद्देश्य सड़कों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना और निर्माण तथा मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की जांच करना बताया गया है।
जिलाधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
सड़क सुधार की निगरानी के लिए जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी दी गई है। इसके तहत प्रत्येक जिले में सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कर फोटो और वीडियो के साथ रिपोर्ट शासन को भेजने की व्यवस्था का उल्लेख है। सड़कों की गुणवत्ता जांचने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की भी बात कही गई है। यदि निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सड़क की शिकायत के लिए पोर्टल और टोल फ्री नंबर का दावा
दिए गए विवरण में यह भी कहा गया है कि लोग अपने क्षेत्र की खराब सड़क की फोटो या वीडियो मुख्यमंत्री पोर्टल अथवा टोल फ्री नंबर के माध्यम से भेज सकेंगे। शिकायतों पर 48 घंटे के भीतर कार्रवाई किए जाने की व्यवस्था का भी उल्लेख है। हालांकि, इस व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक पोर्टल, टोल फ्री नंबर और समय-सीमा की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
देहरादून सहित अन्य जिलों में मरम्मत पर जोर
देहरादून में सड़कों के पैचवर्क और मरम्मत कार्यों में तेजी आने का दावा किया गया है। वहीं, पौड़ी, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी और नैनीताल समेत अन्य जिलों में भी अधिकारियों को सड़कों की स्थिति का जायजा लेने और आवश्यक सुधार कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी दी गई है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम मुद्दा
उत्तराखंड में सड़कें लंबे समय से आम लोगों की प्रमुख बुनियादी जरूरतों में शामिल रही हैं। खराब सड़कों के कारण स्थानीय निवासियों, व्यापारियों, स्कूली बच्चों और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विपक्ष भी समय-समय पर सड़क और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरता रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री का सड़क मार्ग से निरीक्षण करने का प्रस्ताव प्रशासनिक निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन निरीक्षण, मरम्मत कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता के आधार पर ही किया जा सकेगा।
जनता को क्या होगा फायदा?
यदि सड़क मरम्मत और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सकती है। गड्ढों की मरम्मत से यात्रा अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। पर्यटन और चारधाम यात्रा से जुड़े मार्गों की बेहतर स्थिति भी राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल, मुख्यमंत्री के प्रस्तावित सड़क निरीक्षण और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आना बाकी है।





