गुरुग्राम। हरियाणा में तहसील स्तर पर संपत्तियों की रजिस्ट्रियों को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुग्राम की वजीराबाद तहसील में एक तहसीलदार के तबादले के बावजूद पद नहीं छोड़ने और लगातार रजिस्ट्रियां किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि तबादला आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित तहसीलदार रजिस्ट्रियां कर रहे । मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा के मुख्य सचिव तक पहुंचाई गई है। इस पूरे प्रकरण ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली, अधिकारियों की जिम्मेदारी और तबादला आदेशों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
तहसीलदार गुरुदेव का पक्ष, बोले- मार्गदर्शन मांगा है

मामले पर वजीराबाद के तहसीलदार गुरुदेव ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उन्हें तबादले से संबंधित आदेश 30 अक्टूबर को प्राप्त हुए थे। उन्होंने गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर और अपने विभाग के एफसीआर को ईमेल के माध्यम से पत्र लिखकर आगे की कार्यवाही को लेकर मार्गदर्शन मांगा था। गुरुदेव के अनुसार, उनके पास एसआईआर (SIR) का भी चार्ज है और वह एक ईआरओ के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसी वजह से वजीराबाद में उनका स्टेशन रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से लिखित रूप में मार्गदर्शन मांगा गया है। रजिस्ट्रियों को लेकर तहसीलदार गुरुदेव का कहना है कि जब तक उनके स्थान पर कोई दूसरा अधिकारी नहीं आता, तब तक उन्हें रजिस्ट्री करने का अधिकार है। सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से आगे काम जारी रखने या नहीं रखने के संबंध में जो भी निर्देश मिलेंगे, वह उनका पालन करेंगे।
पहले भी उठ चुका है तबादले के बाद रजिस्ट्रियों का मामला
मिली जानकारी के अनुसार, तहसीलदार गुरुदेव इससे पहले करीब दो साल तक सोहना तहसील में तैनात रहे थे। इसके बाद उनका तबादला वजीराबाद तहसील में किया गया था। वजीराबाद गुरुग्राम की महत्वपूर्ण और अधिक राजस्व वाली तहसीलों में शामिल है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से तहसील में आम जनता को हो रही परेशानियों का मुद्दा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने उठाया गया था। इसके बाद पिछले महीने की 15 तारीख को संबंधित तहसीलदार का वजीराबाद से तबादला कर दिया गया था। हालांकि, अब आरोप हैं कि तबादला आदेश जारी होने के बावजूद उन्होंने तहसील का चार्ज नहीं छोड़ा और लगातार रजिस्ट्रियों का काम जारी रखा। इस दौरान करीब 730 रजिस्ट्रियां किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन रजिस्ट्रियों की वास्तविक संख्या और उनकी वैधानिक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
आपत्तियों वाली संपत्तियों की रजिस्ट्रियों को लेकर भी आरोप
इस मामले के सामने आने के बाद गुरुग्राम की तहसीलों में रजिस्ट्री प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि कई बार ऐसी संपत्तियों की रजिस्ट्रियां भी की जाती हैं, जिन पर पहले से आपत्तियां दर्ज होती हैं या जिन्हें संबंधित अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान मंजूरी नहीं देते।आरोप यह भी हैं कि अधिकारियों के तबादले के बाद ऐसी रजिस्ट्रियों को जल्दबाजी में निपटाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और रजिस्ट्री रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इससे पहले बादशाहपुर तहसील में भी इसी तरह का मामला सामने आने की चर्चा रही थी। आरोप था कि तबादले और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद एक नायब तहसीलदार रजिस्ट्रियों का काम करता रहा। बाद में संबंधित अधिकारी को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायत
वजीराबाद तहसील से जुड़े इस मामले में अब शिकायत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा के मुख्य सचिव तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि शिकायत के साथ संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों को भी अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। वहीं, मामले को लेकर कुछ लोग पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
अब प्रशासन से पूछे जा रहे हैं ये सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि तबादला आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित तहसीलदार किस प्रशासनिक अधिकार के तहत वजीराबाद तहसील में रजिस्ट्रियां कर रहे हैं? क्या उन्हें किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी? यदि अनुमति दी गई थी तो क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी हुआ था? इसके अलावा करीब 730 रजिस्ट्रियों की जांच कब होगी और यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि तबादले के बाद की गई सभी रजिस्ट्रियां नियमानुसार और वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई हैं? फिलहाल, इस मामले में जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले की जांच के लिए क्या कदम उठाता है और तबादले के बाद की गई रजिस्ट्रियों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कोई जांच कराई जाती है या नहीं।






