गुरुग्राम में पटाखों की धड़ल्ले से बिक्री! प्रतिबंध के बावजूद बाजारों और गलियों में सजी दुकानें, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

गुरुग्राम में पटाखों की धड़ल्ले से बिक्री, प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में सजी दुकानें, प्रशासन पर सवाल

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गुरुग्राम, 4 नवंबर (न्यू इंडिया न्यूज नेटवर्क)। दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम लागू होने के बावजूद गुरुग्राम में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी होती दिखाई दे रही है। जिला प्रशासन की ओर से पटाखों की बिक्री पर पाबंदी होने के दावों के बीच शहर के भीड़भाड़ वाले बाजारों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों और गलियों तक पटाखों की बिक्री धड़ल्ले से होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर देखने में आ रहा है कि शहर के कई बाजारों और रिहायशी इलाकों की गलियों में पटाखों की दुकानें लगी हुई हैं। दुकानदार खुलेआम पटाखे बेच रहे हैं, लेकिन इन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई फिलहाल सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन की ओर से पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है तो फिर बाजारों में इतनी बड़ी संख्या में पटाखे कैसे बेचे जा रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नियमों की अनदेखी

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर निर्देश जारी किए हैं। ग्रीन पटाखों को लेकर भी निर्धारित नियम और समय-सीमा का पालन जरूरी है। इसके बावजूद यदि प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री हो रही है तो यह नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। दिल्ली-NCR में प्रदूषण पहले से ही चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में पटाखों की अनियंत्रित बिक्री और इस्तेमाल से स्थिति और खराब होने की आशंका है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले बाजारों और संकरी गलियों में पटाखों का भंडारण और बिक्री आगजनी जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ा सकती है।

भीड़भाड़ वाले इलाकों और गलियों में भी दुकानें

गुरुग्राम के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों के बाजारों में भी पटाखों की बिक्री होने की बात सामने आ रही है। कई जगहों पर गलियों में छोटी-छोटी दुकानें लगाकर पटाखे बेचे जा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर यदि कोई चिंगारी या आग लगने की घटना होती है तो आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इन दुकानों की जानकारी नहीं है या फिर कार्रवाई के अभाव में दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं? हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत और किसी प्रकार के लेन-देन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

एक तरफ जिला प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण और पटाखों की बिक्री पर पाबंदी को लेकर निर्देश जारी करता है, वहीं दूसरी तरफ बाजारों में पटाखों की बिक्री जारी रहने की शिकायतें प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही हैं। यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो संबंधित विभागों को तत्काल जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए।अब जरूरत है कि जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से बाजारों, ग्रामीण क्षेत्रों और रिहायशी गलियों में जांच अभियान चलाएं। अवैध रूप से पटाखे बेचने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि प्रतिबंध के बावजूद पटाखे दुकानों तक कैसे पहुंच रहे हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागेगा

गुरुग्राम में पटाखों की बिक्री को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन की कार्रवाई को लेकर है। क्या अधिकारियों की टीम इन बाजारों में पहुंचकर जांच करेगी? क्या नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी? या फिर हर बार की तरह आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?फिलहाल गुरुग्राम के लोगों की नजर जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा भी प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।

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Author: New India News Network

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