पश्चिम बंगाल,30 मार्च।
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपने चरम पर है और राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।
BJP ने चुनाव आयोग से की शिकायत
ताज़ा घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा, जहां उसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई। इस प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, पीयूष गोयल और सुकांत मजूमदार शामिल थे। नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया को “हाईजैक” करने की कोशिश की जा रही है।
मतदाताओं को धमकाने का आरोप
किरण रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि राज्य में मतदाताओं को डराया-धमकाया जा रहा है। उनके अनुसार, टीएमसी कार्यकर्ता और स्थानीय नेतृत्व घर-घर जाकर लोगों पर दबाव बना रहे हैं कि वे भाजपा को वोट न दें।भाजपा का आरोप है कि राज्य का प्रशासन और पुलिस तंत्र पूरी तरह टीएमसी के प्रभाव में काम कर रहा है, जिससे निष्पक्ष चुनाव कराना मुश्किल हो गया है। पार्टी ने मांग की है कि चुनाव आयोग राज्य के प्रशासन और पुलिस को अपने नियंत्रण में लेकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करे।
TMC का पलटवार
वहीं, ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा पर ही पलटवार किया है। टीएमसी का कहना है कि भाजपा केंद्र सरकार की ताकत का इस्तेमाल कर राज्य में अस्थिरता फैलाना चाहती है। पार्टी नेताओं के अनुसार, भाजपा खुद मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश कर रही है और बेबुनियाद आरोप लगाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इन आरोपों को “राजनीतिक हताशा” बताया।
चुनाव आयोग की सख्ती
इस बीच चुनाव आयोग ने भी स्थिति को गंभीरता से लिया है। आयोग ने मतदाता सूची संशोधन के दौरान सामने आई हिंसा और धमकियों की घटनाओं पर चिंता जताई है और राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वोटर लिस्ट और SIR पर सवाल
जानकारी के अनुसार, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद चौथी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की गई है। हालांकि, इसमें कितने नाम जोड़े या हटाए गए, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इससे पहले करीब 60 लाख नाम “निर्णयाधीन” श्रेणी में बताए गए थे।
क्यों अहम है यह चुनाव?
विशेषज्ञों के मुताबिक, 2026 का बंगाल चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है और इसे “सेमीफाइनल” की तरह देखा जा रहा है। एक ओर भाजपा 2021 की हार का बदला लेना चाहती है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
चुनावी मुद्दे और माहौल
चुनाव में मुद्दे भी तेज हो गए हैं। भाजपा जहां राष्ट्रीय सुरक्षा, घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठा रही है, वहीं टीएमसी इसे “बंगाल बनाम केंद्र” की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है। इसके अलावा, भाजपा और कांग्रेस के कुछ उम्मीदवारों ने भी आरोप लगाया है कि राज्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच रहा है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर है कि वह निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करे। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ये आरोप केवल सियासी रणनीति हैं या फिर चुनावी प्रक्रिया पर इनका वास्तविक असर पड़ता है।








