गुरुग्राम के जलभराव पर सियासी घमासान, राव इंद्रजीत ने CM से मांगा जवाब; हुड्डा ने किया पलटवार
गुरुग्राम 25 August / 24 अगस्त की बारिश के बाद गुरुग्राम में हुए जलभराव को लेकर अब सियासी घमासान तेज हो गया है। एक ओर गुरुग्राम सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर अधिकारियों की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राव के बयान पर पलटवार किया है। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी जलभराव को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान कहा कि मानसून से पहले अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में यह दावा किया गया था कि इस बार गुरुग्राम में जलभराव नहीं होने दिया जाएगा। इसके बावजूद 24 अगस्त की बारिश में शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया। राव ने मुख्यमंत्री से अधिकारियों को तलब कर यह पूछने की मांग की कि आखिर उनके दावे क्यों फेल हुए और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।

बारिश के दौरान गुरुग्राम की यातायात व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई। कई स्थानों पर वाहन और स्कूल बसें जलभराव में फंसी रहीं। सुभाष चौक के आसपास कई वाहनों के फंसने की जानकारी सामने आई, जिनमें स्कूल बसें भी शामिल थीं। बच्चों के अभिभावकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

इसी दौरान IFFCO Chowk के पास सर्विस रोड का एक हिस्सा धंसने से बड़ा गड्ढा बन गया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित हिस्से को बैरिकेड किया गया और संबंधित एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। बारिश, जलभराव और सड़क धंसने की घटनाओं ने गुरुग्राम की ड्रेनेज और सड़क व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राव इंद्रजीत ने गुरुग्राम में जलभराव की समस्या के लिए प्राकृतिक जल बहाव के पुराने रास्तों के बाधित होने को भी बड़ी वजह बताया। उनका कहना है कि अरावली क्षेत्र से आने वाला बारिश का पानी पहले प्राकृतिक रास्तों से निकलता था, लेकिन तेजी से हुए निर्माण और कई जगह कब्जों के कारण इन रास्तों का बहाव प्रभावित हुआ है।
उन्होंने पुराने प्राकृतिक जल बहाव वाले रास्तों का निष्पक्ष सर्वे कराने और जहां कब्जे या अतिक्रमण पाए जाएं, वहां कार्रवाई करने का सुझाव दिया। साथ ही राव ने कहा कि अब आबादी वाले इलाकों को हटाना व्यावहारिक समाधान नहीं है, इसलिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
राव ने सुझाव दिया कि जिस तरह जमीन के नीचे मेट्रो चलाई जा सकती है, उसी तरह बारिश के पानी की निकासी के लिए अंडरग्राउंड टनल या पाइपलाइन का नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। इसके जरिए पानी को पुराने प्राकृतिक बहाव वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने के साथ-साथ आर्टिफिशियल लेक, नजफगढ़ ड्रेन के आसपास के क्षेत्र, सुल्तानपुर और दमदमा झील जैसे इलाकों में जल संचयन की संभावनाएं भी तलाशने की बात कही गई है। उन्होंने इस योजना के लिए IIT जैसे तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने का सुझाव दिया है।
राव ने गुरुग्राम के गिरते भूजल स्तर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बारिश के पानी को केवल शहर से बाहर निकालना समाधान नहीं है। जल संचयन और भूजल रिचार्ज की व्यापक योजना भी तैयार करनी होगी। इसके लिए नगर निगम, GMDA, HSVP और अन्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई।

वहीं राव इंद्रजीत के बयान पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पलटवार किया। पत्रकारों के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि “राव साहब उस वक्त भी मंत्री थे और आज भी मंत्री हैं।” उन्होंने BJP सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब पिछली सरकार पर ठीकरा फोड़ने के बजाय मौजूदा सरकार को समस्या का समाधान करना चाहिए।
हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में गुरुग्राम को विकास की बुलंदियों तक पहुंचाया गया, जबकि BJP के शासन में शहर की स्थिति खराब हुई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पहले भी बारिश होती थी, लेकिन उस समय गुरुग्राम में आज जैसी जलभराव की स्थिति क्यों नहीं बनती थी।
उधर कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी सोशल मीडिया के जरिए गुरुग्राम के जलभराव को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हर मानसून में गुरुग्राम को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
गुरुग्राम के जलभराव को लेकर अब सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर समस्या के कारण और समाधान दोनों लंबे समय से सामने हैं, तो शहर को हर मानसून में जलभराव से स्थायी राहत कब मिलेगी?






