गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में विश्व पर्यावरण दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, युवाओं से प्लास्टिक मुक्त भारत का संकल्प लेने की अपील
गुरुग्राम, 05 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ‘द वन स्टेज’ संस्था के सहयोग से विद्यार्थियों और शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया तथा उन्हें प्रदूषण मुक्त समाज बनाने के लिए संकल्प दिलाया गया। 
हर युवक और युवती कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाए , उद्योगपति बोधराज सीकरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी एवं उद्योगपति बोधराज सीकरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रदूषण को कम करने के लिए निरंतर और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि हर युवक और युवती कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाए और उसकी देखभाल अपने बच्चों की तरह करें। उन्होंने कहा कि आज देश में पर्यावरण को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन जब तक हम व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास नहीं करेंगे, तब तक स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।

उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पेड़ों की संख्या बढ़ाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन युवाओं को भी इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
जब तक हम स्वयं प्लास्टिक और पॉलिथीन का उपयोग बंद नहीं करेंगे

इस अवसर पर गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के कुलपति संजय कौशिक ने कहा कि आज पूरे देश में विश्व पर्यावरण दिवस को एक जन आंदोलन के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने प्लास्टिक मुक्त समाज की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जब तक हम स्वयं प्लास्टिक और पॉलिथीन का उपयोग बंद नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बाजार जाते समय कपड़े का थैला साथ लेकर जाएं और प्लास्टिक के उपयोग से बचें।
प्लास्टिक की बोतलों से गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।
यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. संजय अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह प्लास्टिक का उपयोग बंद करेगा। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक की बोतलों और अन्य वस्तुओं का लगातार उपयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है और इससे कई गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस दिशा में जागरूकता फैलाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
हमारे शरीर के लिए जहर के समान है , प्रोफेसर रानी

प्रोफेसर रानी ने कहा कि आज का युवा देश का भविष्य है और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग हमारे शरीर के लिए जहर के समान है और यह धीरे-धीरे कई बीमारियों को जन्म देता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने जीवन में प्लास्टिक का उपयोग कम करें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
तो बाजार में इनका उत्पादन अपने आप कम हो जाएगा , प्रोफेसर धीरेंद्र कौशिक

प्रोफेसर धीरेंद्र कौशिक ने कहा कि यदि लोग प्लास्टिक उत्पादों की खरीद बंद कर दें, तो बाजार में इनका उत्पादन अपने आप कम हो जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से छोटे बच्चों के स्वास्थ्य का जिक्र करते हुए कहा कि आजकल बच्चों को प्लास्टिक की बोतलों से दूध पिलाया जाता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे इस दिशा में सतर्क रहें और प्लास्टिक के उपयोग से बचें।
मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है , दीक्षा पाटिया
कार्यक्रम में ‘द वन स्टेज’ संस्था की कन्वीनर दीक्षा पाटिया ने कहा कि उनकी संस्था लगातार पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रही है और सरकार के साथ मिलकर प्रदेश को स्वच्छ बनाने में योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है और यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।
युवाओं को इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए

उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और समाज को जागरूक बनाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित छात्रों, शिक्षकों और गणमान्य व्यक्तियों ने पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया। साथ ही सभी को अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।







