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हरियाणा में पंजाबी समाज की अनदेखी की तो भाजपा का हश्र भी कांग्रेस जैसा होगा

हरियाणा में पंजाबी समाज की अनदेखी की तो भाजपा का हश्र भी कांग्रेस जैसा होगा : सुरेश अरोड़ा भिवानी, 11 जुलाई : हरियाणा की राजनीति में हमेशा से किंगमेकर की भूमिका निभाने वाले पंजाबी समाज के मान-सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व बारे अरोड़ा विकास मंच ने हुंकार भरी है। 

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हरियाणा में पंजाबी समाज की अनदेखी की तो भाजपा का हश्र भी कांग्रेस जैसा होगा : सुरेश अरोड़ा
भिवानी, 11 जुलाई : हरियाणा की राजनीति में हमेशा से किंगमेकर की भूमिका निभाने वाले पंजाबी समाज के मान-सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व बारे अरोड़ा विकास मंच ने हुंकार भरी है। 

इतिहास गवाह है
मंच के राष्ट्रीय विस्तारक एवं समाज सेवक सुरेश अरोड़ा ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इतिहास गवाह है, जिस भी दल ने पंजाबी समाज के योगदान को नजरअंदाज किया है, उस दल को सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। अरोड़ा विकास मंच के राष्ट्रीय विस्तारक सुरेश अरोड़ा ने हरियाणा के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जब-जब हरियाणा में कांग्रेस सत्ता में आई, उसमें पंजाबी समाज का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

हरियाणा के मतदाताओं के साथ विश्वासघात

उसी दिन से कांग्रेस के पतन के दिन शुरू


उन्होंने याद दिलाया कि साल 1991 में जब चौधरी भजन लाल मुख्यमंत्री बने, तब पंजाबी समाज के 18 विधायक बने थे, उनकी सरकार में पंजाबी समाज के 11 मंत्रियों को शामिल कर पंजाबी समाज को ऐतिहासिक और मजबूत प्रतिनिधित्व दिया गया था।
सुरेश अरोड़ा ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने ना केवल पंजाबी समाज बल्कि पूरे हरियाणा के मतदाताओं के साथ विश्वासघात किया था। चौधरी भजन लाल के नेतृत्व के दम पर प्रदेश में 67 विधायकों के पूर्ण बहुमत को पूरी तरह से नजरअंदाज करके सुनियोजित षड्यंत्र के तहत भजनलाल की बजाय भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हरियाणा का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया। उसी दिन से कांग्रेस के पतन के दिन शुरू हो गए थे।
सुरेश अरोड़ा ने पूर्व की हुड्डा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2005 के बाद एक सोची-समझी रणनीति के तहत पंजाबी समाज के बड़े दिग्गज नेताओं की राजनीति को खत्म करने का खेल शुरू किया गया। इस राजनीतिक षड्यंत्र का सबसे बड़ा शिकार पानीपत के 6 बार विधायक रहे प्रतिष्ठित बलबीर पाल शाह का परिवार हुआ। उन्होंने कहा कि राजनीतिक द्वेष के चलते शाह परिवार के दोनों भाइयों के बीच विवाद पैदा कर उस परिवार का राजनीतिक बंटवारा करवा दिया गया। इसके बाद एक-एक करके पूरे हरियाणा में पंजाबी समाज के सभी कद्दावर नेताओं को मुख्यधारा की राजनीति से हाशिए पर धकेल दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम और पंजाबी समाज के साथ लगातार किये गये अपमान को देखते हुए हरियाणा के पूरे पंजाबी समाज ने एकमत होकर वर्ष 2014 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा था। समाज के इसी एकतरफा समर्थन के कारण कांग्रेस अर्श से फर्श पर आ गई और आज राज्य में उसकी हालत दयनीय हो गई है। यही वजह है कि चुनाव आते ही कांग्रेस को एक बार फिर पंजाबी समाज की याद सताने लगी है। अरोड़ा विकास मंच के राष्ट्रीय विस्तारक ने वर्तमान सत्ताधारी दल भाजपा को भी कड़े शब्दों में सचेत किया है। सुरेश अरोड़ा ने कहा कि अब भाजपा भी उसी ढर्रे पर चलने लगी है और पंजाबी समाज की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि हम भाजपा नेतृत्व को स्पष्ट चेतावनी देना चाहते हैं कि वह कांग्रेस के अतीत और उसके हश्र से सबक ले। पंजाबी समाज के मान-सम्मान और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सत्ता और संगठन में उचित स्थान दिया जाए। राजनीति में किसी को भी टेकन फॉर ग्रांटेड नहीं लिया जा सकता। यदि कांग्रेस पंजाबी समाज को दोबारा मनाने में कामयाब हो गई, तो भाजपा की हालत भी कांग्रेस जैसी होने में वक्त नहीं लगेगा

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Author: New India News Network

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