जंतर-मंतर पर आंदोलन तेज, आज केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधिमंडल के बीच तीसरे दौर की वार्ता; देशभर के युवाओं की निगाहें बैठक पर
नई दिल्ली, 25 जुलाई।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा धरना-प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलन के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में युवा जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है तथा हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इसी बीच आंदोलन को लेकर शनिवार को केंद्र सरकार और CJP के प्रतिनिधिमंडल के बीच तीसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक दोपहर में होगी। इस बैठक को आंदोलन के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर सहमति बनेगी और क्या निर्णय लिए जाएंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी वार्ता समाप्त होने के बाद ही सामने आएगी।
प्रदर्शनकारी लगातार परीक्षा प्रणाली में सुधार, युवाओं से जुड़े मुद्दों और अपनी अन्य मांगों को लेकर सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के मंच से पहले केंद्र सरकार को दो दिन का समय दिया गया था। आयोजकों का कहना है कि समय सीमा का एक दिन बीत चुका है, जबकि दूसरा दिन शनिवार को पूरा होगा। यदि सरकार की ओर से संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता है तो आगे बड़े आंदोलन की रणनीति घोषित की जा सकती है।
धरना-स्थल पर दिनभर युवाओं का आना जारी है। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता भी आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा कई राजनीतिक दलों के नेता भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन जता चुके हैं। इससे आंदोलन का राजनीतिक महत्व भी लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
संभावित भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग बढ़ा दी है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल और त्वरित कार्रवाई दल (QRT) को भी तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
राजनीतिक गलियारों में भी शनिवार की बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि यदि वार्ता सकारात्मक रहती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है, जबकि बातचीत बेनतीजा रहने की स्थिति में आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब पूरे देश की नजर शनिवार को होने वाली तीसरे दौर की वार्ता पर टिकी है। बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनती है या आंदोलन आगे और व्यापक रूप लेगा।







