संत रविदास का संदेश समाज को जोड़ने और समानता स्थापित करने का सबसे बड़ा आधार: मंत्री कृष्ण लाल पंवार
चंडीगढ़, 29 जुलाई। हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी का जीवन और उनके विचार आज भी समाज को समानता, प्रेम, भाईचारे और मानवता का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने ऐसे समय में समाज को सामाजिक समरसता का संदेश दिया, जब जाति-पांति, छुआछूत और भेदभाव अपने चरम पर था। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।
देश के 27 संगठनात्मक जिलों से गुजर रही है।
पानीपत में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की पवित्र कलश यात्रा वाराणसी से प्रारंभ होकर देश के 27 संगठनात्मक जिलों से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि संत रविदास जी के प्रेम, समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने बताया कि जहां-जहां यह यात्रा पहुंच रही है, वहां समाज के सभी वर्गों द्वारा इसका भव्य स्वागत किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि 30 जुलाई को यह पवित्र कलश यात्रा गुरुग्राम के सरहौल बॉर्डर पहुंचेगी, जहां प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, संत समाज और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा इसका स्वागत किया जाएगा। इसके बाद कलश को गुरुग्राम स्थित श्री शीतला माता मंदिर में स्थापित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु दर्शन एवं पूजन कर सकेंगे। मंत्री ने कहा कि यह यात्रा समाज में आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को और मजबूत करेगी।
पंवार ने कहा कि हरियाणा सरकार संतों और महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र के उमरी में लगभग पांच एकड़ भूमि पर 124 करोड़ रुपये की लागत से गुरु रविदास धाम का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह धाम भविष्य में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बनेगा, जहां संत रविदास जी के जीवन, दर्शन और सामाजिक संदेश को संरक्षित एवं प्रसारित किया जाएगा।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे संत रविदास जी के प्रेम, समानता, सेवा, सामाजिक न्याय और मानवता के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने बताया कि संत रविदास का जन्म 15वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट सीर गोवर्धनपुर में हुआ माना जाता है। उनके पिता का नाम संतोक दास (रघु) तथा माता का नाम करमा देवी था।
मंत्री ने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि मनुष्य की महानता उसके विचारों, कर्मों और सेवा भावना से तय होती है। उनकी वाणी में प्रेम, करुणा, समानता और मानव कल्याण की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्चे कर्म, विनम्रता और निष्काम भक्ति है तथा लोगों को बाहरी आडंबर छोड़कर सत्य, सेवा और सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए।
कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि 20 फरवरी को संत रविदास जयंती के अवसर पर प्रदेशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने ‘बेगमपुरा’ नामक ऐसे आदर्श समाज की परिकल्पना की थी, जहां किसी प्रकार का दुख, भय, अन्याय, भेदभाव, कर या शोषण न हो और प्रत्येक व्यक्ति समान अधिकारों के साथ सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सके। उन्होंने कहा कि आज भी सामाजिक न्याय और समानता की चर्चा में संत रविदास की बेगमपुरा की परिकल्पना सबसे बड़ी प्रेरणा बनी हुई है।
पत्रकार वार्ता के दौरान मंत्री ने संत रविदास के प्रसिद्ध वचन “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश आज भी लोगों को सिखाता है कि यदि मन पवित्र हो तो ईश्वर की प्राप्ति कहीं भी संभव है।








