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गुरुग्राम में 7 सेक्टर डिवाइडिंग सड़कों के किनारे विकसित होंगे हरित क्षेत्र, बारिश का पानी जमीन में उतारकर होगा भूजल रिचार्ज

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सात सेक्टर डिवाइडिंग सड़कों के किनारे हरित क्षेत्रों का विकास और अपग्रेड करेगा जीएमडीए

हरित पट्टियों को बनाया जाएगा वर्षाजल के प्राकृतिक रिसाव का माध्यम, शहर के ग्रीन कवर और भूजल रिचार्ज को मिलेगा बढ़ावा

गुरुग्राम, 12 अगस्त 2026। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) शहर में हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण को बेहतर बनाने और वर्षाजल के प्राकृतिक रूप से जमीन में रिसाव की व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सात प्रमुख सेक्टर डिवाइडिंग सड़कों के किनारे स्थित हरित क्षेत्रों का विकास, अपग्रेड और नियमित रखरखाव करेगा।

जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.सी. मीणा ने बताया कि सेक्टर 47/49, 47/50, 43/53, 43/52ए, 44/52, 45/52 और 46/51 को विभाजित करने वाली सड़कों के किनारे हरित क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य शहर के ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को कम करना और वर्षाजल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।

बारिश के पानी को हरित पट्टियों तक पहुंचाने की तैयारी

जीएमडीए के अनुसार मानसून की तैयारियों के तहत इन सड़क मार्गों के किनारे स्थित कई हरित पट्टियों की पहले ही सफाई और लेवल नीचे करने का काम किया जा चुका है। हरित क्षेत्रों में जमा मलबे और अन्य सामग्री को हटाने के बाद जमीन का स्तर नीचे किया गया है, ताकि बारिश का पानी आसानी से इन क्षेत्रों की ओर जा सके।

इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य बारिश के पानी को सड़कों पर जमा होने से रोकना है। हरित पट्टियों की ओर बेहतर ढलान तैयार होने से वर्षाजल सड़क की सतह से दूर होकर निर्धारित हरित क्षेत्रों तक पहुंच सकेगा। इससे भारी बारिश के दौरान आसपास की सड़कों पर जलभराव की संभावना कम होगी।

प्राकृतिक तरीके से होगा भूजल रिचार्ज

जीएमडीए इन हरित पट्टियों का इस्तेमाल भूजल रिचार्ज के लिए भी करेगा। बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में जमा होने वाला पानी धीरे-धीरे मिट्टी में रिसेगा, जिससे भूजल स्तर को प्राकृतिक रूप से रिचार्ज करने में मदद मिलेगी।

जीएमडीए का मानना है कि वर्षाजल को तुरंत नालों के जरिए बाहर निकालने के बजाय स्थानीय स्तर पर जमीन में रिसने का अवसर देना अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल जल प्रबंधन व्यवस्था हो सकती है।

‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में काम करेंगे क्षेत्र

पी.सी. मीणा ने कहा कि इन हरित क्षेत्रों का महत्व केवल जल निकासी तक सीमित नहीं है। लैंडस्केपिंग और नियमित रखरखाव के बाद ये क्षेत्र आसपास के शहरी इलाकों के लिए ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में भी काम करेंगे।

इन क्षेत्रों के विकास से शहर के ग्रीन कवर में वृद्धि होगी और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच नागरिकों को अधिक हरित स्थान उपलब्ध होंगे। साथ ही, बेहतर हरित वातावरण से शहर की पर्यावरणीय गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है।

सौंदर्यीकरण के साथ उपयोगिता पर भी जोर

जीएमडीए द्वारा हरित क्षेत्रों का विकास सौंदर्यीकरण और उपयोगिता दोनों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। लैंडस्केपिंग और रखरखाव की ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे हरित पट्टियां आकर्षक दिखाई देने के साथ-साथ वर्षाजल के प्राकृतिक अवशोषण क्षेत्र के रूप में भी प्रभावी ढंग से काम करती रहें।

प्राधिकरण का प्रयास है कि सड़क किनारे विकसित होने वाली ये ग्रीन बेल्ट शहर की सुंदरता बढ़ाने के साथ जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

प्राकृतिक और इंजीनियर्ड सिस्टम का बेहतर समन्वय

जीएमडीए द्वारा शहरी विकास के साथ हरित अवसंरचना को जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। विशेष रूप से मानसून की तैयारियों के तहत वर्षाजल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने, पानी की निकासी के तंत्र में सुधार करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं।

प्राधिकरण प्राकृतिक और इंजीनियर्ड दोनों प्रणालियों के बेहतर समन्वय के जरिए गुरुग्राम में वर्षाजल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

सात प्रमुख सड़कों को मिलेगा हरित स्वरूप

सात प्रमुख सेक्टर डिवाइडिंग सड़कों के किनारे हरित क्षेत्रों के विकास और नियमित रखरखाव से इन सड़क मार्गों की उपयोगिता बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। आसपास के सेक्टरों में रहने वाले लोगों को बेहतर हरित वातावरण उपलब्ध होगा।

जीएमडीए का यह कदम गुरुग्राम में हरियाली बढ़ाने, वर्षाजल के बेहतर प्रबंधन, जलभराव कम करने और भूजल संरक्षण की दिशा में दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे शहर को अधिक हरित, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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Author: New India News Network

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