Edition

15 अगस्त 1947.चरखे से प्लेन तक और बैलगाड़ी से बुलेट ट्रेन तक का सफर

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

न्यू दिल्ली / 15 अगस्त 1947… यह सिर्फ एक तारीख नहीं थी, बल्कि सदियों की गुलामी के बाद भारत के नए सफर की शुरुआत थी। जिस देश ने आजादी के समय गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी और कमजोर औद्योगिक ढांचे जैसी चुनौतियों के बीच अपनी यात्रा शुरू की थी, वह भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। चरखे से प्लेन तक और बैलगाड़ी से बुलेट ट्रेन तक का यह सफर 79 वर्षों में भारत के बदलते स्वरूप की कहानी कहता है।आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर थी। ऐतिहासिक अनुमानों के मुताबिक उस दौर में विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी करीब तीन प्रतिशत तक सिमट चुकी थी। देश की बड़ी आबादी गरीबी में जीवन गुजार रही थी और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर था। शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक थी। 1947 में देश की साक्षरता दर करीब 12 प्रतिशत थी।आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब चार ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच चुकी है और देश दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में अपनी जगह बना चुका है। साक्षरता दर करीब 81 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गई है। औसत जीवन प्रत्याशा, जो आजादी के समय करीब 32 वर्ष थी, अब 70 वर्ष से अधिक हो चुकी है।

आजादी के समय भारत में आम आदमी की आय बेहद कम थी। 1947 में प्रति व्यक्ति सालाना आय कुछ सौ रुपये के आसपास थी। यानी महीने की औसत आय करीब 21 रुपये के आसपास बैठती थी। उस दौर में आम भारतीय परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी बड़ी चुनौती थी।आज प्रति व्यक्ति आय लाखों रुपये सालाना के स्तर तक पहुंच चुकी है। हालांकि महंगाई और रुपये की क्रय शक्ति में बदलाव के कारण 1947 और 2026 के आंकड़ों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती, लेकिन यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार की बड़ी तस्वीर जरूर दिखाता है।भारत की आर्थिक यात्रा हमेशा आसान नहीं रही। 1991 में देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम हो गया था और भारत के सामने आयात भुगतान का संकट खड़ा हो गया था। हालात इतने गंभीर थे कि देश को अपना सोना तक गिरवी रखना पड़ा।
आज वही भारत विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में मजबूत स्थिति में है। 2026 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर के आसपास है। यह भंडार वैश्विक आर्थिक संकट या अचानक पैदा होने वाली परिस्थितियों में भारत को सुरक्षा प्रदान करता है।यानी जिस देश को कभी विदेशी मुद्रा बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा था, वही देश आज दुनिया के बड़े विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले देशों में शामिल है।चरखे से प्लेन तक का सफर आजादी के समय भारत कृषि प्रधान देश था। गांवों में चरखा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का प्रतीक था। उद्योग सीमित थे और आधुनिक तकनीक तथा भारी मशीनरी के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था।विमान निर्माण की शुरुआत आजादी से पहले जरूर हो चुकी थी। 1940 में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट कंपनी की स्थापना हुई थी, जो आगे चलकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL बनी। लेकिन 1947 में भारत के पास आधुनिक विमान निर्माण का मजबूत औद्योगिक तंत्र नहीं था।
आज कहानी बदल चुकी है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े विमान बाजारों में शामिल है। देश में एयरपोर्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। हवाई यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है और भारतीय एयरलाइंस ने बड़ी संख्या में नए विमानों के ऑर्डर दिए हैं।सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि भारत अब सिर्फ विदेशों से विमान खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता। रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। HAL और निजी क्षेत्र की कंपनियां विमान, हेलीकॉप्टर और दूसरे एयरोस्पेस उत्पादों के निर्माण में आगे बढ़ रही हैं।
जिस भारत में कभी चरखा आत्मनिर्भरता का प्रतीक था, वही भारत आज विमान निर्माण और एयरोस्पेस तकनीक में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। यही है चरखे से प्लेन तक का सफर।

भारत का बदलाव सिर्फ विमान तक सीमित नहीं है। आजादी के समय देश में परिवहन का बड़ा हिस्सा सड़क और रेल पर निर्भर था और आधुनिक बुनियादी ढांचा सीमित था।
आज देश में एक्सप्रेस वे का जाल फैल रहा है। आधुनिक रेलवे नेटवर्क विकसित हो रहा है। वंदे भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें चल रही हैं और देश बुलेट ट्रेन परियोजना की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।यानी जिस देश में कभी लंबी दूरी तय करना कई घंटों और दिनों का काम था, वहां आज आधुनिक परिवहन व्यवस्था तेजी से आकार ले रही है।आजादी के समय दुनिया शीत युद्ध के दो गुटों में बंटी हुई थी। भारत ने गुटनिरपेक्षता का रास्ता चुना। तत्कालीन नेतृत्व ने फैसला किया कि भारत किसी एक शक्ति खेमे का हिस्सा बनने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखेगा।
2026 का भारत इस नीति को एक नए तरीके से आगे बढ़ता दिखाई देता है।भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी करता है, रूस के साथ पुराने रक्षा संबंध बनाए रखता है, खाड़ी देशों के साथ आर्थिक और ऊर्जा संबंध मजबूत करता है और इजरायल तथा यूरोप के साथ भी अपने रिश्तों को आगे बढ़ाता है।यानी भारत अब किसी एक खेमे तक सीमित नहीं रहना चाहता। राष्ट्रीय हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ रिश्ते बनाना उसकी विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

1947 का भारत अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रहा था।
2026 का भारत दुनिया के साथ कदम मिलाकर चलने के साथ-साथ अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।
12 प्रतिशत साक्षरता से करीब 81 प्रतिशत तक…
32 साल की औसत जीवन प्रत्याशा से 70 वर्ष से ज्यादा तक…
कुछ सौ रुपये की प्रति व्यक्ति आय से लाखों रुपये सालाना तक…
आर्थिक संकट और सोना गिरवी रखने की मजबूरी से सैकड़ों अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार तक…
और चरखे से विमान निर्माण तक।
यह बदलाव एक दिन में नहीं आया।
इसके पीछे 79 वर्षों की मेहनत, नीतियां, वैज्ञानिक उपलब्धियां, औद्योगिक विकास और करोड़ों भारतीयों की मेहनत शामिल है।
भारत आज भी पूरी तरह चुनौतियों से मुक्त नहीं है। गरीबी, बेरोजगारी, असमानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं अब भी देश के सामने हैं।
लेकिन 15 अगस्त 1947 को जिस भारत ने अपनी यात्रा शुरू की थी और 15 अगस्त 2026 को जो भारत दुनिया के सामने खड़ा है…
इन दोनों तस्वीरों के बीच का फर्क बताता है कि देश ने कितनी लंबी दूरी तय की है।
चरखे से प्लेन तक…
बैलगाड़ी से बुलेट ट्रेन तक…
12 प्रतिशत साक्षरता से 81 प्रतिशत तक…
और कमजोर अर्थव्यवस्था से वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने तक
यह है आजाद भारत के 79 वर्षों की कहानी।

New India News Network
Author: New India News Network

new india news network

Leave a Comment

और पढ़ें