गुरुग्राम, 21 अगस्त। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को शुक्रवार को गुरुग्राम में काले झंडे दिखाए जाने का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री शहर के जॉन हॉल में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता करने पहुंचे थे। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल से कुछ दूरी पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री जिस स्थान पर बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, उसके सामने ही हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह का आवास है। इसी आवास से कुछ दूरी पर कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता काले झंडे लेकर मौजूद थे।

मुख्यमंत्री के निकलते ही सड़क पर पहुंचे प्रदर्शनकारी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही मुख्यमंत्री बैठक समाप्त कर बाहर निकले और उनका काफिला आगे बढ़ा, बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता काले झंडे लेकर सड़क की ओर दौड़ पड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। मुख्यमंत्री का काफिला वहां से आगे निकल गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कार्यक्रम स्थल के आसपास बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था भी मौजूद थी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के निकलने से कुछ समय पहले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों का काले झंडों के साथ वहां तक पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
खास तौर पर इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से कुछ ही दूरी पर प्रदर्शनकारी पहले से मौजूद थे, लेकिन पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली।
पुलिस और खुफिया विभाग की भूमिका पर सवाल
मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ खुफिया विभाग की भी अहम भूमिका रहती है। स्थानीय पुलिस के अलावा पुलिस कमिश्नर स्तर पर भी सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था की निगरानी की जाती है।
ऐसे में मुख्यमंत्री के काफिले के सामने अचानक काले झंडे लेकर प्रदर्शनकारियों के पहुंचने के बाद पुलिस और खुफिया विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद गुरुग्राम से लेकर चंडीगढ़ तक पुलिस महकमे में हलचल की चर्चा है।
क्या अधिकारियों पर होगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान हुई इस सुरक्षा चूक के लिए क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? क्या खुफिया विभाग को पहले से प्रदर्शन की जानकारी थी या नहीं? और अगर जानकारी नहीं थी तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के इतने करीब कैसे पहुंच गए?
इन सवालों को लेकर फिलहाल संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
काली टी-शर्ट में पहुंचे कार्यकर्ता
बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल कई कांग्रेस कार्यकर्ता काली टी-शर्ट पहनकर पहुंचे थे। आरोप है कि मंत्री के आवास के पास पहुंचने के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने काली टी-शर्ट निकालकर उन्हें काले झंडे के रूप में इस्तेमाल किया और मुख्यमंत्री के काफिले के सामने विरोध जताया।
फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित चूक को लेकर आने वाले समय में विभागीय स्तर पर जांच या कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।









