गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित ‘गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ का मुख्यमंत्री ने पेश किया सरकारी प्रस्ताव
सदन में सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव
सीर गोवर्धनपुर की पावन मिट्टी से हरियाणा में पहुंचेगा गुरु रविदास जी का समरसता संदेश
5 अक्तूबर से 5 नवंबर तक हरियाणा में निकलेगी ‘समरसता यात्रा’
गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व पर हरियाणा में होंगे विशेष कार्यक्रम
उमरी में 124 करोड़ से बनेगा भव्य गुरु रविदास धाम, 125 फुट ऊंची प्रतिमा होगी आकर्षण का केंद्र
नई दिल्ली , 1 सितंबर – हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित देशव्यापी ‘गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ के संबंध में सरकारी प्रस्ताव पेश किया और सदन में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ।मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि गत 29 जुलाई, 2026 को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शुरू हुआ यह अभियान 20 फरवरी, 2027 तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी के समता, ममता, करुणा, सेवा, भक्ति, सामाजिक न्याय एवं सामाजिक समरसता के संदेश को समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाना तथा विभिन्न वर्गों में सामाजिक एकता को और मजबूत करना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान का शुभारंभ संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर, वाराणसी से हुआ। इस अवसर पर वहां की पवित्र मिट्टी से भरे कलश का पूजन कर उन्हें देशभर के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को सौंपा गया। हरियाणा में श्री गुरु रविदास जी की जन्मस्थली की पावन मिट्टी की कलश यात्रा 4 अगस्त, 2026 को पहुंची तथा इसके स्वागत में 5 अगस्त, 2026 को गुरुग्राम स्थित माता शीतला मंदिर परिसर में भव्य समारोह आयोजित किया गया। इसमें लाए गए कलशों को जिला एवं ग्राम स्तर तक पहुंचाया जा रहा है, जहां श्रद्धालु पावन मिट्टी को स्थानीय मंदिरों की मिट्टी में मिलाकर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
5 अक्तूबर से 5 नवंबर तक हरियाणा में चलेगी समरसता यात्रा
नायब सिंह सैनी ने कहा कि समरसता यात्रा आगामी 5 अक्तूबर को हरियाणा में पहुंचेगी और 5 नवंबर, 2026 तक चलेगी। यात्रा के स्वागत के लिए इसके मार्ग में पूरे प्रदेश में प्रवेश द्वार और स्वागत स्थल तैयार किए जाएंगे तथा जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, 26 नवंबर, 2026 से 15 जनवरी, 2027 तक छात्रावासों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग केंद्रों में विशेष संवाद आयोजित किए जाएंगे।
भक्ति आंदोलन के माध्यम से समाज में नई जागृति लाई
गुरु रविदास जी का जन्म 649 वर्ष पहले माघ पूर्णिमा के पावन दिन काशी की पुण्य भूमि पर हुआ था। उनका व्यक्तित्व पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह शीतल एवं उज्ज्वल था। उन्होंने भक्ति आंदोलन के माध्यम से समाज सुधार का साहसिक और ऐतिहासिक कार्य किया। उस समय जाति-पाति, अंधविश्वास तथा ऊंच-नीच में उलझे समाज में उन्होंने नई जागृति पैदा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी का अमर संदेश ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ हमें सिखाता है कि यदि नीयत साफ हो, भाव पवित्र हों और कर्म लोक-कल्याण के लिए हों, तो साधारण से साधारण स्थान भी तीर्थ बन जाता है। उन्होंने अध्यात्म को महलों और मंदिरों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे गरीब की झोपड़ी, मेहनतकश के पसीने और मानव सेवा से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी को निर्गुण भक्ति आंदोलन का प्रमुख संत माना जाता है। उनकी भक्ति में जाति, वर्ग अथवा बाहरी दिखावे के लिए कोई स्थान नहीं था। उन्हें स्वामी रामानंद जी का शिष्य माना जाता है और इस दृष्टि से संत कबीर तथा गुरु रविदास जी को एक ही व्यापक भक्ति परंपरा का प्रतिनिधि माना जाता है।








