गुरुग्राम, 2 सितंबर। गुरुग्राम में हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री एवं गुरुग्राम सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने प्रभावित नागरिकों के प्रति खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शहर में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान केवल पानी को पंप करके बाहर निकालने से नहीं होगा। इसके लिए प्राकृतिक जल निकासी तंत्र को बहाल करने, बारिश के पानी का अधिकतम संचयन करने और भूजल पुनर्भरण पर एक साथ काम करना होगा।
राव इंद्रजीत सिंह ने बुधवार को गुरुग्राम स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में जीएमडीए, नगर निगम गुरुग्राम, जिला प्रशासन और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने शहर में जलभराव के कारणों, मौजूदा जल निकासी व्यवस्था और अब तक किए गए उपायों की समीक्षा की। बैठक के बाद प्रेस वार्ता में उन्होंने दीर्घकालिक समाधान को लेकर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं।
हाल के दिनों में गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद राजीव चौक, सुभाष चौक, एनएच-48, नरसिंहपुर, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, एमजी रोड, आईएफएफसीओ चौक और अन्य प्रमुख हिस्सों में जलभराव से यातायात प्रभावित हुआ था।
पुरानी जल निकासी व्यवस्था से छेड़छाड़ का असर

राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम ने पिछले दो दशकों में तेजी से विकास किया है और यह क्षेत्र हरियाणा के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के दौरान प्राकृतिक जल निकासी तंत्र के साथ हुई छेड़छाड़ का असर अब सामने आ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौर में कई स्थानों पर प्राकृतिक नालों और पानी के पुराने बहाव क्षेत्रों में निर्माण एवं कॉलोनियों का विकास हुआ। इससे बारिश के पानी के प्राकृतिक प्रवाह के रास्ते बाधित हुए। उनका कहना है कि पुराने जल मार्गों को बहाल किए बिना केवल पंपिंग के जरिए समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सकता। इसी तरह के आरोप राव इंद्रजीत सिंह ने हाल में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात के दौरान भी उठाए थे।
प्राकृतिक नालों और जल प्रवाह के रास्तों की होगी मैपिंग
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि गुरुग्राम के प्राकृतिक नदी-नालों और पुराने जल प्रवाह मार्गों की सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए विस्तृत मैपिंग कराई जानी चाहिए। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पहले बारिश का पानी किन रास्तों से बहता था और वर्तमान में कहां-कहां अवरोध पैदा हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर प्राकृतिक जल निकासी मार्गों के ऊपर अब इमारतें, अस्पताल, स्कूल और अन्य निर्माण हो चुके हैं। ऐसे मामलों में हर निर्माण को हटाना व्यावहारिक नहीं हो सकता। इसलिए जरूरत के अनुसार वैकल्पिक तकनीकी व्यवस्था विकसित करनी होगी।
भूमिगत पाइपलाइन और सुरंग से पानी के प्रवाह का सुझाव
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि जहां प्राकृतिक रास्तों को पूरी तरह बहाल करना संभव नहीं है, वहां जमीन के नीचे बड़ी क्षमता वाली पाइपलाइन अथवा सुरंग बनाकर बारिश के पानी को उसके पुराने प्राकृतिक चैनल की दिशा में ले जाया जा सकता है।
उन्होंने इससे पहले भी सुझाव दिया था कि जिस तरह मेट्रो के लिए भूमिगत सुरंगों का निर्माण किया जा सकता है, उसी तरह बारिश के पानी को भूमिगत पाइपलाइन के जरिए नजफगढ़ ड्रेन, कृत्रिम झीलों तथा जल संचयन वाले क्षेत्रों की ओर ले जाया जा सकता है।
भूजल पुनर्भरण पर विशेष जोर
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम में भूजल स्तर लगातार चिंता का विषय बन रहा है। ऐसे में बारिश के पानी को केवल शहर से बाहर निकालने के बजाय उसका अधिकतम उपयोग भूजल पुनर्भरण के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने तकनीकी रूप से उपयुक्त स्थानों पर इंजेक्शन ट्यूबवेल लगाने का सुझाव दिया। इसके जरिए उपचारित बारिश के पानी को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत भूजल स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भूजल में पानी पहुंचाने से पहले उसकी गुणवत्ता और उपचार की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि दूषित पानी सीधे जमीन के भीतर न जाए।
सरकारी जमीनों पर बनेंगी वाटर बॉडीज
केंद्रीय राज्य मंत्री ने नगर निगम और अन्य सरकारी एजेंसियों के पास उपलब्ध ऐसी जमीनों की पहचान करने पर जोर दिया, जिनका वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर वाटर बॉडीज विकसित कर बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर संग्रहित किया जा सकता है।
इससे जलभराव कम करने के साथ-साथ बारिश के पानी को संरक्षित करने और भूजल पुनर्भरण में भी मदद मिलेगी।
सीएंडडी वेस्ट से बंद नालों की होगी पहचान
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि कई प्राकृतिक नालों में निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट यानी सीएंडडी वेस्ट डाले जाने से उनकी जल वहन क्षमता प्रभावित हुई है। उन्होंने ऐसे सभी स्थानों की पहचान और मैपिंग कराने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि नालों की वास्तविक चौड़ाई और जल प्रवाह क्षमता को बहाल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि बारिश के दौरान पानी के प्राकृतिक बहाव में बाधा न आए।
तीन बिंदुओं पर आधारित होगी जल प्रबंधन योजना
राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में जलभराव के स्थायी समाधान के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं बताईं—
- बारिश के पानी का अधिकतम भूजल पुनर्भरण।
- जल संचयन के लिए वाटर बॉडीज का विकास।
- प्राकृतिक नदी-नालों और जल निकासी मार्गों की सफाई एवं पुनर्बहाली।
उन्होंने कहा कि इन तीनों मोर्चों पर एक साथ काम किए बिना गुरुग्राम की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल होगा।
विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने पर जोर
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि समस्या का समाधान वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर होना चाहिए। इसके लिए आईआईटी और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जा सकती है। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की टीम इस विषय पर अध्ययन कर रही है और इसका उद्देश्य गुरुग्राम के लिए दीर्घकालिक जल प्रबंधन मॉडल तैयार करना है।
अधिकारियों की जवाबदेही और मॉनिटरिंग जरूरी
राव इंद्रजीत सिंह ने जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण किसी परियोजना की जिम्मेदारी और उसकी जानकारी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिससे परियोजनाओं की प्रगति की लगातार निगरानी हो सके और लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सके।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम की जलभराव की समस्या वर्षों से चली आ रही है और इसे टुकड़ों में किए जाने वाले उपायों से खत्म नहीं किया जा सकता। हाल में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही, प्राकृतिक जल मार्गों के सर्वे और बारिश के पानी के संचयन की व्यापक योजना की मांग की थी








