उत्तराखंड के सरकारी स्कूल की अनूठी पहल, संस्कृत में गूंज रही प्रार्थना सभा, नन्हे बच्चे सुना रहे श्लोक और समाचार

चमोली के सरकारी स्कूल में संस्कृत की अनूठी पहल, बच्चे संस्कृत में पढ़ रहे समाचार और संविधान की प्रस्तावना

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चमोली/गैरसैंण, 29 अक्टूबर। उत्तराखंड के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित सरकारी विद्यालय भी शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग कर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण जनपद चमोली के विकासखंड गैरसैंण स्थित राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय छिड़िया में देखने को मिला है। यहां सुबह की प्रार्थना सभा अब पूरी तरह संस्कृत भाषा में संचालित की जा रही है। विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी संस्कृत में प्रार्थना करने के साथ-साथ समाचार, सामान्य ज्ञान, कहानियां और भारतीय संविधान की प्रस्तावना का भी वाचन कर रहे हैं। विद्यालय प्रशासन के अनुसार, राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय छिड़िया जनपद चमोली का एकमात्र ऐसा विद्यालय है, जहां संपूर्ण प्रार्थना सभा संस्कृत भाषा में आयोजित की जा रही है। विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कारों और प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ना है।

सरस्वती वंदना से लेकर संविधान की प्रस्तावना तक संस्कृत में

विद्यालय की प्रार्थना सभा को विशेष रूप से तैयार किया गया है। यहां प्रतिदिन सरस्वती वंदना, संस्कृत प्रार्थना, समूह गान और प्रतिज्ञा संस्कृत भाषा में कराई जाती है। इसके अतिरिक्त भारतीय संविधान की प्रस्तावना का संस्कृत में वाचन भी इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों द्वारा संस्कृत भाषा में कहानियां सुनाई जाती हैं और समाचार पढ़े जाते हैं। सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्नोत्तर भी संस्कृत में आयोजित किए जाते हैं। बच्चों को संस्कृत साहित्य से परिचित कराने के लिए 50 संस्कृत श्लोकों पर आधारित सुभाषितानि को भी शामिल किया गया है। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यालय में ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिसमें बच्चे संस्कृत को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय दैनिक व्यवहार में भी अपनाना सीख रहे हैं।

संगीत, ताल और लय के साथ संस्कृत सीख रहे नन्हे विद्यार्थी

विद्यालय की इस अनूठी पहल की खास बात यह है कि संस्कृत प्रार्थना सभा को संगीत, ताल, छंद और लय के साथ तैयार किया गया है। इससे बच्चों के लिए संस्कृत भाषा का अध्ययन रोचक और आनंददायक बन रहा है। शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों से तैयार इस कार्यक्रम में विद्यार्थी प्रतिदिन उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। संस्कृत श्लोकों का लयबद्ध उच्चारण करने के साथ बच्चे विभिन्न गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। विद्यालय परिवार का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियों से बच्चों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ने के साथ उनके उच्चारण, आत्मविश्वास, स्मरण शक्ति और अभिव्यक्ति कौशल के विकास में भी सहायता मिल सकती है।

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में शिक्षा का नया प्रयोग

राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय छिड़िया उत्तराखंड के चमोली जनपद के सुदूरवर्ती दुर्गम क्षेत्र में स्थित है। पहाड़ी क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद विद्यालय के शिक्षक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए नए प्रयोग कर रहे हैं। विद्यालय परिवार के अनुसार, इस पहल के पीछे सभी अध्यापकों का सामूहिक सहयोग, समर्पण और निरंतर परिश्रम है। शिक्षकों ने प्रार्थना सभा की विभिन्न गतिविधियों को इस प्रकार व्यवस्थित किया है कि प्राथमिक स्तर के विद्यार्थी भी सरलता से संस्कृत भाषा में भागीदारी कर सकें।

भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से बच्चों को जोड़ने का प्रयास

विद्यालय प्रशासन का उद्देश्य केवल बच्चों को संस्कृत भाषा पढ़ाना नहीं है, बल्कि उनके जीवन में भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों का समावेश करना भी है। संस्कृत भाषा के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जा रहा है। विद्यालय का प्रयास है कि बच्चे कम उम्र से ही संस्कृत के महत्व को समझें और दैनिक जीवन में इसका उपयोग करने के लिए प्रेरित हों। विद्यालय परिवार का विश्वास है कि संस्कृत भाषा में नियमित प्रार्थना सभा आयोजित करने से विद्यार्थियों में भाषा के प्रति आत्मीयता विकसित होगी और वे भविष्य में भी भारतीय संस्कृति तथा ज्ञान परंपरा के संरक्षण में योगदान दे सकेंगे।

दूसरे सरकारी विद्यालयों के लिए भी बन सकती है मिसाल

गैरसैंण के दुर्गम क्षेत्र में स्थित इस प्राथमिक विद्यालय की पहल अन्य सरकारी विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच शिक्षकों द्वारा बच्चों को नई शिक्षण गतिविधियों से जोड़ने का यह प्रयास शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर संस्कृत भाषा को प्रार्थना सभा से जोड़ने का प्रयोग बच्चों को भाषा सीखने के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर प्रदान कर रहा है।

संस्कृत हमारी संस्कृति और ज्ञान की अमूल्य धरोहर : विद्यालय परिवार

राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय छिड़िया के प्रधानाध्यापक एवं समस्त विद्यालय परिवार ने इस पहल के माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण संदेश दिया है।विद्यालय परिवार का कहना है, “संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति, ज्ञान, संस्कार एवं गौरव की अमूल्य धरोहर है। आइए, संस्कृत को अपने जीवन एवं व्यवहार का हिस्सा बनाकर भारतीय संस्कृति की इस महान विरासत को आगे बढ़ाएं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों का यह प्रयास दर्शाता है कि सकारात्मक सोच, समर्पण और नवाचार के माध्यम से दूरदराज के सरकारी विद्यालय भी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर सकते हैं। चमोली के राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय छिड़िया में गूंजते संस्कृत के श्लोक और प्रार्थनाएं अब इस विद्यालय की विशेष पहचान बन रहे हैं।

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Author: New India News Network

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