14 मार्च।
- होर्मुज स्ट्रेट और आसपास कई मालवाहक जहाज फंसे हैं, इनमें एक भारतीय जहाज भी शामिल है।
- जहाज पर 34 भारतीय क्रू मेंबर सवार हैं, जो खतरे के बीच फंसे हुए हैं।
- जहाज एलपीजी से भरा हुआ है, जिसमें लगभग 36 लाख घरेलू गैस सिलेंडर भरने की क्षमता है।
- जहाज की कमान कप्तान वीरेंद्र विश्वकर्मा के पास है, जो लगातार भारत सरकार से मदद मांग रहे हैं।
- जहाज कुवैत के मीना अल अहमदी से गुजरात के दीनदयाल कांडला बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था, लेकिन 28 फरवरी से समुद्री मार्ग पर प्रतिबंध के कारण आगे नहीं बढ़ सका।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब और खतरनाक होता जा रहा है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने भी पलटवार किया और पूरे इलाके में मिसाइलों और ड्रोन की आवाज गूंज रही है। इस युद्ध जैसे हालात के बीच कई मालवाहक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फंसे हुए हैं।इन्हीं में एक भारतीय जहाज भी शामिल है, जिस पर सवार 34 भारतीय क्रू मेंबर इस समय खतरे के बीच फंसे हुए हैं।यह जहाज एलपीजी से भरा एक बड़ा टैंकर है, जिसमें इतनी गैस है कि उससे लगभग 36 लाख घरेलू गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं।
इस जहाज की कमान कप्तान वीरेंद्र विश्वकर्मा के हाथों में है, जो अपने साथियों के साथ लगातार भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।जानकारी के अनुसार, यह टैंकर कुवैत के मीना अल अहमदी बंदरगाह से गुजरात के दीनदयाल कांडला बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था। लेकिन 28 फरवरी से समुद्री मार्ग पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण जहाज आगे नहीं बढ़ सका। फिलहाल यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात के पास मीना साकर बंदरगाह क्षेत्र में समुद्र में रुककर इंतजार कर रहा है और सुरक्षित रास्ते का इंतजार कर रहा है।
जहाज से भेजे गए एक भावुक संदेश में कप्तान वीरेंद्र ने बताया कि उनके आसपास लगातार मिसाइलें और ड्रोन उड़ रहे हैं। हर तरफ सायरन बज रहे हैं और माहौल बेहद तनावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हर पल ऐसा लगता है जैसे कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे हालात में वे भारतीय नौसेना के सुरक्षा दल का इंतजार कर रहे हैं ताकि सभी सुरक्षित भारत लौट सकें।उधर, मुंबई के दहिसर में मौजूद कप्तान का परिवार भी गहरी चिंता में है। उनकी पत्नी निलपा विश्वकर्मा ने बताया कि पिछले कई दिनों से उन्हें नींद नहीं आ रही। उनका 10 साल का बेटा वेदांश और 12 साल की बेटी निर्वी अपने पिता की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
परिवार की चिंता इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि इलाके में इंटरनेट कनेक्टिविटी ठीक नहीं है, जिसकी वजह से कप्तान से नियमित संपर्क नहीं हो पा रहा। हर कॉल या संदेश का इंतजार परिवार को बेचैन कर रहा है।बताया जा रहा है कि जहाज में फिलहाल लगभग 60 दिनों का राशन बचा है। इस बीच शिपिंग कंपनी जीईएससीओ और संबंधित मंत्रालय लगातार भारतीय नौसेना के संपर्क में हैं ताकि जहाज और उस पर सवार सभी भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।कप्तान और उनके परिवार की अब एक ही मांग है: भारतीय नौसेना जल्द से जल्द कार्रवाई करे और युद्ध जैसे हालात में फंसे इन 34 भारतीयों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाए।







