नई दिल्ली,31 मार्च।
सोमवार को संसद में नक्सलवाद के मुद्दे पर जोरदार सियासी टकराव देखने को मिला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।नक्सलवाद पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस की नीतियों और उसके नेताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से नक्सलवाद को बढ़ावा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि “नक्सलियों के साथ रहते-रहते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं।
गृह मंत्री ने दावा किया कि राहुल गांधी अपने राजनीतिक जीवन में कई बार ऐसे लोगों और संगठनों के संपर्क में रहे हैं, जिनका संबंध नक्सल विचारधारा से रहा है। उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें कुछ ऐसे संगठनों की भागीदारी रही, जिनका झुकाव नक्सलवाद की ओर था।इसके अलावा, अमित शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने ओडिशा और हैदराबाद में ऐसे व्यक्तियों से मुलाकात की, जिन्हें नक्सल विचारधारा के करीब माना जाता है।
शाह ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुख्यात नक्सली माड़वी हिडमा के मारे जाने के बाद उसके समर्थन में नारे लगाए गए थे और उस घटना से जुड़ा वीडियो राहुल गांधी द्वारा साझा किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी किसकी तय होगी। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि 1970 से लेकर अब तक नक्सलवाद से जुड़ी हिंसा में हजारों लोगों की जान गई है, और इसके लिए कांग्रेस की वामपंथी सोच जिम्मेदार रही है। उन्होंने पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय राष्ट्रीय सलाहकार परिषद जैसी संस्थाएं बनाई गईं, जो संवैधानिक ढांचे से बाहर होते हुए भी फैसलों को प्रभावित करती थीं।
अमित शाह ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ मामलों में कांग्रेस नेताओं ने नक्सल आरोपियों के समर्थन में कदम उठाए, जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि विचारधारा का भी संघर्ष है और इसमें किसी भी प्रकार की नरमी देश के लिए खतरनाक हो सकती है।
कांग्रेस का पलटवार
अमित शाह के इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गृह मंत्री के बयानों को “पूरी तरह झूठ” करार दिया। भूपेश बघेल ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान नक्सल प्रभावित राज्यों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं, जिनमें केंद्र सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल थे। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस सरकार ने कभी नक्सलियों का समर्थन किया हो, तो उसका कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। एक तरफ सरकार कांग्रेस पर नक्सल समर्थक होने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रही है। अब देखना होगा कि यह सियासी टकराव आगे किस दिशा में जाता है और इसका असर देश की राजनीति और नीतियों पर क्या पड़ता है।







