नई दिल्ली, 3 अप्रैल।
राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच टकराव तेज़ हो गया है। राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी नाराज़गी जाहिर की है।
राघव चड्ढा का आरोप: जनता के मुद्दे उठाने से रोका गया
राघव चड्ढा ने अपने वीडियो में कहा कि उन्हें संसद में जनता से जुड़े मुद्दे उठाने से रोका जा रहा है। उन्होंने मिडिल क्लास पर टैक्स, एयरपोर्ट पर महंगे खाने, गिग वर्कर्स की समस्याएं, बैंकिंग शुल्क और अन्य जनहित के मुद्दों का जिक्र किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आम लोगों की आवाज संसद में उठाना कोई अपराध है?
चड्ढा का दावा है कि AAP ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर उन्हें बोलने का समय न देने की बात कही।
पार्टी ने उनके स्थान पर पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को राज्यसभा का नया उपनेता नियुक्त किया है।
AAP नेताओं का पलटवार
राघव चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा कि चड्ढा कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय नहीं रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर चड्ढा ने ठोस पहल नहीं की।
सौरभ भारद्वाज ने भी चड्ढा को निशाने पर लेते हुए कहा कि संसद में सीमित समय का उपयोग गंभीर मुद्दों के लिए होना चाहिए, न कि छोटे-छोटे विषयों के लिए। उन्होंने कहा, “जो डर गया, समझो वो मर गया। हम सब अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं, निडरता हमारी पहचान है।”
वहीं, अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि चड्ढा मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से बचते रहे और पार्टी के संघर्षों से दूरी बनाए रखी।
भगवंत मान का बयान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद में ऐसे बदलाव समय-समय पर होते रहते हैं और यह एक सामान्य प्रक्रिया है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई सांसद गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों की बजाय छोटे मुद्दों पर ध्यान देता है, तो उसे ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ माना जा सकता है।
राजनीतिक हलचल तेज़
इस पूरे विवाद ने आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को उजागर कर दिया है। यह मामला अब सिर्फ एक पद से हटाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पार्टी के अंदर लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांसदों की भूमिका को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि AAP नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है और राघव चड्ढा आगे क्या कदम उठाते हैं।







