नई दिल्ली, 21 अगस्त। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC ने अपने पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे गाने का फैसला किया है। कांग्रेस ने इसके पीछे 1937 में लिए गए अपने पुराने फैसले का हवाला दिया है।
बीजेपी ने कांग्रेस के इस फैसले को तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ते हुए जोरदार हमला बोला है। गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले को राष्ट्रविरोधी बताया और आरोप लगाया कि 1937 का फैसला देश के विभाजन की परिस्थितियों से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने वंदे मातरम् के 150 वें वर्ष के मौके पर सरकारी कार्यक्रमों में पूरे गीत के गायन का निर्णय लिया है।
वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना है कि वंदे मातरम् कांग्रेस और स्वतंत्रता आंदोलन से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है और पार्टी 1937 से इसी संस्करण का पालन करती आई है। कांग्रेस ने बीजेपी पर इस ऐतिहासिक मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
इसी बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति की वापसी बताया है।
यानी एक तरफ कांग्रेस अपने पुराने ऐतिहासिक फैसले का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रवाद और तुष्टिकरण से जोड़कर कांग्रेस को घेर रही है। वंदे मातरम् अब सिर्फ गीत नहीं, बल्कि सियासत का नया अखाड़ा बन गया है।









