गुरुग्राम, 9 सितंबर।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में औसत एवं प्रोविजनल बिलों के लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा करते हुए प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने अधिकारियों को इस महत्वपूर्ण पैरामीटर में तेजी से सुधार लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी अधीक्षण अभियंताओं को लंबित मामलों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने तथा प्रत्येक मामले का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को कहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार डीएचबीवीएन में 31 अगस्त 2026 तक 2,41,604 औसत एवं प्रोविजनल बिलों के मामले लंबित थे। इनमें से अब तक 17,874 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि 2,23,730 मामले अभी भी शेष हैं।
क्षेत्रवार स्थिति के अनुसार हिसार जोन में कुल 1,21,783 मामलों में से 7,706 मामलों का निपटारा किया गया है और 1,14,077 मामले शेष हैं। वहीं दिल्ली जोन में 1,19,821 मामलों में से 10,168 का निपटारा हुआ है तथा 1,09,653 मामले लंबित हैं।
हिसार जोन में लंबित मामले
हिसार जोन के अंतर्गत हिसार सर्कल में सबसे अधिक 44,484 मामले लंबित हैं। इसके बाद जींद में 29,818, भिवानी में 20,436, सिरसा में 9,935 तथा फतेहाबाद में 9,404 मामले शेष हैं।
दिल्ली जोन में लंबित
दिल्ली जोन में पलवल में 34,849, फरीदाबाद में 33,985, गुरुग्राम-1 में 14,399, गुरुग्राम-2 में 11,361, नारनौल में 9,356 तथा रेवाड़ी में 5,703 मामले लंबित हैं।
उपरोक्त कुल मामलों में लगभग 80000 मामले डिफेक्टिव मीटर से सम्बन्धित हैं जिनको तुरंत बदलने की आवश्यकता है। शेष मामलों में साइट चैकिंग रिर्पोट आधार पर बिलिंग दुरुस्त करने की आवश्यकता है।
एमडी ने कहा—‘यह संख्या कम नहीं हो रही’
लंबित मामलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए एमडी विक्रम सिंह ने कहा कि ‘यह संख्या कम नहीं हो रही है।’ क्योंकि नयी बिलिंग साइकिल में मीटर रीडिंग दोषपूर्ण के न नए मामले शामिल हो जाते हैं।उन्होंने सभी एसई को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में इन मामलों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि लंबित मामलों का शीघ्र समाधान हो।
उन्होंने अधिकारियों को केवल दैनिक प्रगति दर्ज करने के बजाय लंबित मामलों के वास्तविक कारणों की पहचान, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा उपभोक्ताओं के बिल संबंधी मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
एमडी विक्रम सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वे औसत एवं प्रोविजनल बिलों की स्थिति के साथ-साथ निगम के अन्य महत्वपूर्ण प्रदर्शन मानकों जैसे नए जारी कनेक्शन की बिलिंग शुरू करना, सोलर के कनेक्शन की समय पर बिलिंग, बिलिंग बंद मामले, हाई बिल मामलों का निवारण, लंबित मीटरिंग व बिलिंग शिकायत निवारण सीएम टूल की पेंडेंसीज़ आदि की भी समीक्षा करेंगे। ऐसे में सभी संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने सर्कल में लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और प्रदर्शन में ठोस सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
दैनिक प्रगति बढ़ाने की आवश्यकता
उपलब्ध आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुल 2,23,730 मामले अभी शेष हैं, ऐसे में लंबित मामलों की संख्या में प्रभावी और निरंतर कमी लाने के लिए दैनिक निपटान की गति बढ़ाना आवश्यक है।
एमडी के निर्देशों के बाद अब सभी सर्कलों में लंबित औसत एवं प्रोविजनल बिलों की सर्कलवार एवं मामलेवार समीक्षा किए जाने तथा नियमित आधार पर प्रगति की निगरानी किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही एवं समय पर बिल उपलब्ध कराना और बिलिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना है।







