गुरुग्राम,17 मार्च।
- चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की साधना और उपासना से सुख और शांति प्राप्त होती है: पं.अमर चन्द भारद्वाज
- चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी, 18 मार्च को अमावस्या रहेगी।
- पं. अमर चंद भारद्वाज के अनुसार, मां दुर्गा की उपासना से सुख, शांति और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:53 से 7:43 और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:54 तक है।
- इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू होने के कारण माता रानी की सवारी “डोली” मानी जाएगी।
गुरुग्राम :आचार्य पुरोहित संघ गुरुग्राम के अध्यक्ष एवम् माता शीतला देवी श्राईन बोर्ड के पूर्व सदस्य कथावाचक पं. अमर चन्द भारद्वाज ने कहा कि चैत्र नवरात्रि में आदिशक्ति मां दुर्गा की साधना और उपासना करने से सुख शांति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। चैत्र नवरात्रि में संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है मंदिरों की घंटियां बजने लगती हैं, घरों में अखंड ज्योति जलने लगती है। मां जगदंबा की इस पावन नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो रहा है। लेकिन इस बार एक बड़ा प्रश्न लोगों के मन में है क्या नवरात्रि 18 मार्च से शुरू होगी या 19 मार्च से? अमावस्या 18 मार्च को प्रातः 8:26 पर प्रारंभ होकर 19 मार्च को प्रातः 6:53 तक रहेगी इसलिए पितरों की अमावस्या 18 मार्च को निकालें और 19 मार्च से नवरात्र प्रारंभ हो जाएंगे। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 6:53 से 7:43 बजे कर सकते हैं। यदि आप इस मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो आप अभिजीत मुहूर्त में भी कर सकते हैं, जो दोपहर 12:06 से 12:54 तक है। कलश स्थापना के दौरान मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और उस पर जल से भरे कलश की स्थापना की जाती है, जिसमें आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है। यह कलश देवी दुर्गा की शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
चैत्र नवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं है, यह शक्ति की आराधना का महापर्व है। पुराणों के अनुसार इसी समय माँ दुर्गा ने महिषासुर जैसे राक्षसों का संहार किया था। नौ दिनों तक देवताओं और दानवों के बीच भयंकर युद्ध चला आकाश में बिजली चमक रही थी, धरती कांप रही थी और जब माँ दुर्गा ने अपने त्रिशूल से महिषासुर का वध किया, तब देवताओं ने माँ की स्तुति की और कहा –“हे जगत जननी आप ही इस सृष्टि की शक्ति हैं।”तभी से नवरात्रि का पर्व मनाया जाने लगा। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि प्रारंभ होती है जोकि इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च (गुरुवार) से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाई जाएंगी। इसी दिन से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि जिस वार से शुरू होती है उसी के अनुसार माता रानी की सवारी मानी जाती है रविवार या सोमवार –हाथी,मंगलवार या शनिवार–घोड़ा, गुरुवार या शुक्रवार – डोली, बुधवार – नाव, इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए इस बार माँ दुर्गा की सवारी डोली होगी।
डोली का आगमन कभी-कभी देश में कुछ परिवर्तन और घटनाओं का संकेत भी माना जाता है । नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत रखा जाता है देवी मंत्रों का जाप किया जाता है और मन को पवित्र किया जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से माँ दुर्गा की आराधना करता है उसके जीवन से दुख बाधाएँ और संकट दूर हो जाते हैं।







