23 मार्च 2026
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में कुछ राहत की खबर सामने आई है। हाल के दिनों में गैस और कच्चा तेल लेकर कई जहाज लगातार भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं, जिससे सप्लाई को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हुई है। अमेरिका के टेक्सास से एलपीजी लेकर एक कार्गो जहाज न्यू मंगलौर पोर्ट पहुंचा है, जबकि रूस से भी एक जहाज कच्चा तेल लेकर भारत आया है। पिछले सात दिनों में कुल पांच जहाज गैस और क्रूड ऑयल लेकर देश पहुंच चुके हैं, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से सकारात्मक संकेत है।
इससे पहले ‘जग लाडकी’ टैंकर मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा था, जिसमें करीब 80 हजार मीट्रिक टन कच्चा तेल था। इसके अलावा ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे एलपीजी कैरियर जहाज भी हजारों टन गैस लेकर भारत पहुंचे थे। हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है, क्योंकि फारस की खाड़ी में अभी भी कई भारतीय जहाज मौजूद हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि सभी सुरक्षित हैं।
इस संकट की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह मार्ग असुरक्षित हो गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है, इसलिए इसका बाधित होना ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने 23 मार्च से राज्यों को 20% अधिक एलपीजी सप्लाई देने का निर्णय लिया है। साथ ही होटल, ढाबे, उद्योग और सामुदायिक रसोई को प्राथमिकता पर गैस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रवासी मजदूरों के लिए छोटे सिलेंडर उपलब्ध कराने और कालाबाजारी रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। फिलहाल सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और वैकल्पिक सप्लाई चैन तैयार करने में जुटी हुई हैं।







