पश्चिम बंगाल,13 अपैल।
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल अपने चरम पर पहुंच चुका है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नंदकुमार और कांथी में जनसभाओं को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला।
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने टीएमसी को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज यह पार्टी “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस राजनीति ने राज्य के विकास को बाधित कर दिया है और बंगाल को अराजकता की ओर धकेल दिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चर्चित नारे “मां, माटी, मानुष” पर भी सवाल उठाए। योगी के मुताबिक, आज राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, जमीन की स्थिति और आम नागरिकों का जीवन—तीनों ही संकट में हैं।
बंगाल की विरासत और वर्तमान पर सवाल
सभा के दौरान योगी आदित्यनाथ ने बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए स्वामी विवेकानन्द, सुभाष चन्द्र बोस और रवीन्द्रनाथ टैगोर को नमन किया। उन्होंने कहा कि जो बंगाल कभी देश को दिशा देता था, वह आज भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से जूझ रहा है।
घुसपैठ और जनसांख्यिकी पर उठाए सवाल
योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि राज्य में तुष्टिकरण की राजनीति और अवैध घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश हो रही है। उन्होंने मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया जैसे जिलों का उदाहरण देते हुए सामाजिक संतुलन बिगड़ने की बात कही।
इसके साथ ही उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा उठाया और कहा कि इस पर ममता बनर्जी की चुप्पी चिंताजनक है, जो कथित तौर पर वोट बैंक की राजनीति का परिणाम है।
यूपी मॉडल और ‘बुलडोजर’ पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 से पहले वहां की स्थिति भी खराब थी, लेकिन “डबल इंजन सरकार” आने के बाद कानून व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अब उत्तर प्रदेश में दंगे और कर्फ्यू नहीं होते और माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने “बुलडोजर मॉडल” का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि अपराध के खिलाफ सख्ती का संदेश भी है।
बंगाल में बदलाव की अपील
अपने भाषण के अंत में योगी आदित्यनाथ ने जनता से बदलाव के लिए मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास, सुरक्षा और सुशासन के लिए नई सरकार की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, योगी आदित्यनाथ का यह भाषण सीधे तौर पर ममता बनर्जी सरकार पर हमला था, जिसमें कानून व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान, घुसपैठ और तुष्टिकरण जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा गया। अब देखना होगा कि चुनावी मैदान में यह सियासी बयानबाजी कितना प्रभाव डालती है और बंगाल की जनता किस दिशा में अपना निर्णय देती है।







