पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव बहुत ही दिलचस्प और टक्कर वाला बन गया है। सट्टा बाजार के अनुसार TMC थोड़ी आगे दिख रही है, लेकिन BJP भी बहुत पीछे नहीं है। यह बताता है कि इस बार परिणाम आखिरी समय तक बदल सकता है।
क्यों है मुकाबला इतना कड़ा?
सबसे बड़ा कारण है जनता के मुद्दे। हाल की खबरों के मुताबिक राज्य में बेरोजगारी, आर्थिक परेशानी और पलायन बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
TMC सरकार अपने वेलफेयर (सरकारी योजनाओं) पर भरोसा कर रही है
BJP इन मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान (identity politics) को उठा रही है…..
TMC की ताकत क्या है ?
ममता बनर्जी की ग्रासरूट पकड़ (जमीनी नेटवर्क) बहुत मजबूत है
महिलाओं और गरीब वर्ग में अच्छी पकड़ है
कई योजनाओं से लोगों का भरोसा बना हुआ है और यही कारण है की सट्टा बाजार में TMC को थोड़ा आगे दिखाया जा रहा है (153 सीट) TMC की झोली में
लेकिन बीजेपी भी कहां हार मानने के मूड में है BJP की ताकत
एंटी-इंकम्बेंसी (सरकार के खिलाफ नाराजगी) का फायदा उठाने की कोशिश कुछ इलाकों में BJP का वोट तेजी से बढ़ा है
पार्टी बदलाव का संदेश दे रही है…..यही वजह है कि BJP भी 139 सीट के आसपास दिखाई जा रही है…
चुनाव में तनाव और विवाद क्योँ है बड़ा सवाल है ये इस बार चुनाव शांत नहीं है, कई जगहों पर….हिंसा और झड़प की खबरें
नेताओं पर हमले,,,,वोटर लिस्ट विवाद (कई नाम हटने का मुद्दा) इससे चुनाव और ज्यादा अनिश्चित (uncertain) हो गया है
कुछ अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर BJP को हल्की बढ़त भी बताई गई है (करीब 52% vs 47%)
सट्टा बाजार TMC हल्की बढ़त (153 vs 139)
ग्राउंड रिपोर्ट: कड़ा मुकाबला
असली फैक्टर:
वोटिंग प्रतिशत
ग्रामीण vs शहरी वोट
आखिरी समय का swing







