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खरीफ फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी नाकाफी, सरकार बढ़ाने पर दोबारा विचार करे – दुष्यंत चौटाला

खरीफ फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी नाकाफी, सरकार बढ़ाने पर दोबारा विचार करे

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चंडीगढ़, 14 मई।

हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने केंद्र सरकार द्वारा सीजन 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी को नाकाफी बताया है और एमएसपी बढ़ाने की मांग सरकार से की है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि सरकार ने धान के एमएसपी में मात्र 72 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से तीन प्रतिशत की ही बढ़ोतरी की है। इसके अलावा बाजरा में 125 रुपए, मक्का में 10 रुपए और मूंग में 12 रूपए की ही मामूली बढ़ोतरी की गई है, जो कि कतई किसानों के हित में नहीं है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को एमएसपी देने की जगह सिर्फ धोखा दे रही है और एमएसपी के नाम पर केवल झूठा दिखावा ही किया जा रहा है।

पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि आज डीजल, खाद और बीज की महंगाई के चलते कृषि लागतें लगातार बढ़ रही है और इन लागतों की भरपाई इतने कम एमएसपी बढ़ाने से पूरी नहीं हो सकती है। दुष्यंत ने भाजपा सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि पहले किसानों को समय पर फसल खराबे का मुआवजा नहीं दिया, उसके बाद फसल खरीद और भुगतान में बहुत देरी की जा रही है और अब सरकार नामात्र एमएसपी बढ़ाकर किसानों की कमर तोड़ने का काम कर रही है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जेजेपी खरीफ फसलों पर मामूली बढ़ोतरी के फैसले का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने की झूठी बातें करके सरकार में आई भाजपा को किसानों का खर्चा घटाने और किसानों को उसकी फसलों का जायज दाम देने के बारे में सोचना चाहिए। दुष्यंत ने कहा कि सरकार को दोबारा खरीफ फसलों के एमएसपी बढ़ाने पर विचार करना चाहिए और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर समर्थन मूल्य निर्धारित करने चाहिए।

पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने यह भी कहा कि एमएसपी किसानों का हक है और फसलों के एक-एक दाने की एमएसपी पर ही खरीद होनी चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार किसानों को एमएसपी देने में विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि पिछली बार खरीद के दौरान भाजपा सरकार ने किसानों के साथ एमएसपी के नाम पर धोखा किया था। पिछले सीजन में धान के दाम में 300 से 400 रुपए की कटौती देखने को मिली थी। वहीं बाजरा 2775 एमएसपी होने के बावजूद 1800 रुपए में किसान बेचने को मजबूर थे। इसी तरह मूंग फसल का एमएसपी करीब 8700 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित होने के बावजूद सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसान प्राइवेट रेट पांच से छह हजार रुपए तक बेचने को मजबूर रहे थे।

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Author: New India News Network

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