गोल चक्कर पर फूटा लोगों का गुस्सा

वहीं, नव-निर्वाचित चेयरपर्सन ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को राहत मिलेगी।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रेवाड़ी में सफाई व्यवस्था की यह बदहाली सिर्फ लापरवाही का नतीजा है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ी प्रशासनिक विफलता या मिलीभगत छिपी हुई है? अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है।

रेवाड़ी। शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर अब लोगों का सब्र जवाब दे गया है। सोमवार को शहर के बीचो-बीच स्थित प्रमुख गोल चक्कर पर स्थानीय निवासियों, गोरक्षकों और सामाजिक संगठनों ने इकट्ठा होकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। लोगों ने साफ शब्दों में कहा कि रेवाड़ी में पिछले करीब 20 वर्षों से सफाई व्यवस्था बदतर बनी हुई है, लेकिन सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। गंदगी से त्रस्त होकर घर छोड़ने की नौबत”
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। नियमित सफाई न होने के कारण सड़कों, गलियों और खाली प्लॉटों में गंदगी फैली हुई है। इससे उठने वाली बदबू और बीमारियों के खतरे ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। कई स्थानीय निवासियों ने कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वे अपने घर छोड़ने तक के लिए मजबूर हो रहे हैं।

कचरे के कारण गौ माता की दर्दनाक मौतें
प्रदर्शन के दौरान गोरक्षकों ने बेहद गंभीर मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि शहर में फैले कचरे के कारण गौ माता की लगातार मौतें हो रही हैं। कचरे में भोजन तलाशते समय गायें प्लास्टिक खा लेती हैं या फिर खुले तारों व बिजली के करंट की चपेट में आ जाती हैं। हाल ही में एक गाय की करंट लगने से मौत का मामला सामने आया, जिसने लोगों में भारी रोष पैदा कर दिया। गोरक्षकों का दावा है कि इससे पहले भी कई गौ माता इसी तरह अपनी जान गंवा चुकी हैं।
26 करोड़ का डोर-टू-डोर टेंडर बेअसर
लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ महीने पहले ही शहर में डोर-टू-डोर कचरा उठाने के लिए करीब 26 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा। कचरा उठाने की व्यवस्था या तो नियमित नहीं है या फिर कई क्षेत्रों में पूरी तरह से फेल हो चुकी है।
सिस्टम पर उठे सवाल, जिम्मेदारी से बच रहे अधिकारी
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सफाई व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारी जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। नगर परिषद और अन्य विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही।
चेयरपर्सन का दावा: “तेजी से हो रहा सुधार”

वहीं, नव-निर्वाचित चेयरपर्सन ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को राहत मिलेगी।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रेवाड़ी में सफाई व्यवस्था की यह बदहाली सिर्फ लापरवाही का नतीजा है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ी प्रशासनिक विफलता या मिलीभगत छिपी हुई है? अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है।







