सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पुलिस कार्रवाई सही थी तो
पुलिसकर्मियों को निलंबित क्यों किया गया?
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई क्यों नहीं
पटना, बिहार 24 जून। भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर बुलाई गई महापंचायत ने बिहार सरकार के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार न्यायिक जांच की बात कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच के आदेश से न्याय मिल जाएगा?सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पुलिस कार्रवाई सही थी तो संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित क्यों किया गया? डीएसपी को पद से क्यों हटाया गया? और अगर कार्रवाई गलत थी तो फिर दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई?महापंचायत में पहुंचे नेताओं ने भी यही सवाल उठाए।
जांच की जद में आखिर कौन आएगा? 
कांग्रेस के पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी ने पूछा कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। वहीं प्रशांत किशोर ने सवाल किया कि न्यायिक जांच की जद में आखिर कौन आएगा? क्या केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर उन लोगों से भी जवाब मांगा जाएगा जिन्होंने कथित तौर पर कार्रवाई का आदेश दिया था?
गोली मारने की जरूरत क्या थी?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर सरकार को घेरा
सरकार की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ रही हैं क्योंकि उसके अपने मंत्री अशोक चौधरी ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अशोक चौधरी ने साफ कहा कि यदि व्यक्ति ने सरेंडर कर दिया था तो उसे गोली मारने की जरूरत क्या थी? उसे गिरफ्तार किया जा सकता था, कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती थी।
निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा , पापु यादव
उधर आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर सरकार को घेरा है। उनका सवाल है कि आखिर रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? क्या सरकार किसी महत्वपूर्ण तथ्य को सामने आने से रोकना चाहती है या फिर जांच पूरी होने का इंतजार कर रही है? बीजेपी कांग्रेस वही पप्पू यादव ने भी मामले में बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि पूरे ऑपरेशन की जिम्मेदारी किसकी थी।मृतक के भाई चंदन तिवारी का कहना है कि परिवार न्याय की लड़ाई को दिल्ली तक ले जाएगा। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या सरकार पीड़ित परिवार का भरोसा जीत पाने में सफल रही है? पापु यादव भरत तिवारी की मौत अब सिर्फ एक एनकाउंटर का मामला नहीं रह गई है। यह बिहार में पुलिस जवाबदेही, प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकार की मंशा पर उठे सवालों का प्रतीक बनता जा रहा है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि न्यायिक जांच सच्चाई सामने लाएगी या फिर विपक्ष के आरोपों के मुताबिक यह मामला भी लंबी प्रक्रिया में उलझकर रह जाएगा?
जब भारत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था
भोजपुरी कलाकारों ने भी उनके परिजनों से मुलाकात कर न्याय की मांग कर चुके है।
वही इस मामले में बिहार की बीजेपी और एनडीए दल में शामिल अन्य पार्टियों के नेता भी दो खेमे में बट गए है। नेता एक तरफ सम्राट चौधरी द्वारा बिठाये गए जांच पर भरोसा रखने के लिए कह रहे है तो वही दूसरी तरफ पुलिस पर यह भी आरोप लगा रहे है की जब भारत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था उसके बाद उसपर गोली क्यों चलाई गई ,क्योंकि गोली मारने का आदेश जब तक हेडक्वार्टर से आता कोई भी अधिकारी गोली नहीं चलाता। अब सभी की निगाहे महापंचायत पर टिकी हुई है की इस पंचायत में क्या फैसला होगा ,तो वही भरत तिवारी के परिजनों से मिलने के लिए बीजेपी कांग्रेस समेत अन्य पार्टियां के नेता पहुंच रहे है इसके अलावा भोजपुरी कलाकारों ने भी उनके परिजनों से मुलाकात कर न्याय की मांग कर चुके है।







