चन्द्रवीर गायत्री
स्टेट हेड
देहरादून उत्तराखंड। आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और पहाड़ी कृषि उत्पादों के संरक्षण से जोड़ने की दिशा में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण केंद्र हैं और इनके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और पारंपरिक विरासत से जोड़ा जा सकता है। अतिथियों ने कहा कि बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक खाद्य पदार्थों और पहाड़ी कृषि उत्पादों को भी दैनिक खान-पान का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे बच्चों के पोषण में सुधार के साथ स्थानीय खाद्य परंपराओं और कृषि उत्पादों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन केवल पोषण और शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी माध्यम हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और परिवारों को पारंपरिक खान-पान तथा स्थानीय उत्पादों के महत्व की जानकारी दी जा सकती है।

55 प्रतिभागियों को कराया गया गढ़ भोज
कार्यक्रम के दौरान सभी 55 प्रतिभागियों को गढ़ भोज कराया गया। इस दौरान प्रतिभागियों और लाभार्थियों को स्थानीय पकवानों को अपने दैनिक भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय व्यंजनों और पारंपरिक खान-पान की उपयोगिता को सामने रखा गया। गढ़ भोज के आयोजन ने स्थानीय खान-पान और संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया। प्रतिभागियों ने स्थानीय पकवानों का आनंद लिया और इन्हें दैनिक भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।
कोमल नौटियाल की गोद भराई रस्म
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती कोमल नौटियाल की गोद भराई की रस्म भी आयोजित की गई। इस अवसर पर मौजूद लोगों ने नाच-गाने के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गोद भराई की रस्म के दौरान महिलाओं और अन्य प्रतिभागियों ने पारंपरिक गीतों और नृत्य के माध्यम से खुशी साझा की। इससे कार्यक्रम में स्थानीय संस्कृति और परंपरा की झलक भी देखने को मिली।
बुजुर्ग महिला और दिव्यांग बालिकाओं का सम्मान
कार्यक्रम में क्षेत्र की सबसे बुजुर्ग महिला श्रीमती नीला देवी को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया और उनके योगदान को सराहा। इसके अलावा दिव्यांग बालिकाओं शिवांशी और अनीशा को भी अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मान के माध्यम से दोनों बालिकाओं का उत्साह बढ़ाया गया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने कहा कि स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और पहाड़ी कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने वाले ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास भविष्य में भी जारी रहना चाहिए।









