पंतनगर, ऊधमसिंह नगर 9 अक्टूबर। उत्तराखंड में मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव, पुनर्वास और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को मजबूत बनाने के लिए राज्य पुलिस एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित कर रही है। 9 अक्टूबर 2026 को गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में होने वाले इस सम्मेलन में पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों, संबंधित विभागों, विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के करीब 200 अधिकारी एवं प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में मानव तस्करी के खिलाफ सख्त रणनीति बनाने, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने और पीड़ितों के संरक्षण एवं पुनर्वास की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

वी. मुरूगेशन करेंगे सम्मेलन का उद्घाटन
सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था वी. मुरूगेशन करेंगे। आयोजन से पहले पुलिस महानिरीक्षक, कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती ने आयोजन स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मानव तस्करी के अंतरराज्यीय और सीमावर्ती पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में पुलिस के साथ सुरक्षा बलों, संबंधित विभागों, न्यायिक व्यवस्था और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
प्रदेश के सभी 13 जनपदों की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट होगी शामिल
सम्मेलन में ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, देहरादून और हरिद्वार सहित आठ जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक भाग लेंगे। इसके अलावा प्रदेश के सभी 13 जनपदों की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के नोडल अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, प्रभारी निरीक्षक और पुलिसकर्मी भी सम्मेलन में शामिल होंगे। इसका उद्देश्य मानव तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई को प्रभावी बनाना, सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान करना और विभिन्न जनपदों के बीच समन्वय स्थापित करना है।
भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी मजबूत करने पर जोर

सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के अधिकारी भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के उपायों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही बाल संरक्षण एवं कल्याण से जुड़े अधिकारियों की भागीदारी भी रहेगी। विभिन्न जनपदों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO), बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य, परिवीक्षा अधिकारी, श्रम विभाग के श्रम निरीक्षक और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी सम्मेलन में शामिल होंगे। मानव तस्करी से जुड़े मामलों में कानूनी अभियोजन को मजबूत बनाने के लिए वरिष्ठ लोक अभियोजकों को भी आमंत्रित किया गया है। वहीं, पीड़ितों के बचाव और पुनर्वास के क्षेत्र में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और समाजसेवियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की गई है।
आधुनिक जांच तकनीकों और कानूनी प्रावधानों पर होगी चर्चा
सम्मेलन के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में मानव तस्करी से संबंधित कानूनी प्रावधानों, आधुनिक अन्वेषण एवं विवेचना तकनीकों और मामलों की प्रभावी जांच से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा पीड़ितों को सुरक्षित बचाने, उन्हें आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराने और पुनर्वास की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में पुलिस, एनजीओ और नागरिक समाज की भूमिका पर भी चर्चा होगी। अलग-अलग विभागों के अनुभवों और सुझावों के माध्यम से मानव तस्करी से जुड़े मामलों में आने वाली चुनौतियों का समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा।
पीड़ितों के पुनर्वास के लिए तैयार होगी प्रभावी कार्ययोजना
उत्तराखंड पुलिस के अनुसार, सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। इसके साथ ही पीड़ितों के बचाव, संरक्षण और पुनर्वास के लिए पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था को सुदृढ़ करना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा तंत्र को प्रभावी बनाना भी सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और प्राप्त सुझावों के आधार पर मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस पहल के माध्यम से राज्य में मानव तस्करी के मामलों से निपटने और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली में बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।








