देहरादून/गैरसैंण, 27 अक्टूबर। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में मंगलवार से विधानसभा सत्र शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आयोजित यह सत्र वर्ष 2026 का गैरसैंण में दूसरा विधानसभा सत्र है। इससे पहले इसी वर्ष मार्च में यहां बजट सत्र आयोजित किया गया था। एक ही वर्ष में दूसरी बार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से गैरसैंण की प्रशासनिक और विधायी भूमिका को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। गैरसैंण लंबे समय से उत्तराखंड की जनभावनाओं, पर्वतीय पहचान और संतुलित विकास की आकांक्षाओं का केंद्र रहा है। राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत करने के लिए यहां नियमित रूप से विधानसभा सत्र आयोजित करने की मांग भी उठती रही है। ऐसे में अक्टूबर में शुरू हुआ विधानसभा सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वर्ष 2014 में हुई थी गैरसैंण में विधानसभा सत्रों की शुरुआत
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस वर्ष पहली बार तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन तथा वर्ष 2017 में भी दो दिवसीय सत्र आयोजित हुआ। वर्ष 2018 में विधानसभा की कार्यवाही छह दिनों तक चली, जबकि वर्ष 2019 में गैरसैंण में कोई विधानसभा सत्र आयोजित नहीं किया गया। वर्ष 2020 में पांच दिवसीय सत्र हुआ और वर्ष 2021 में एक मार्च से छह मार्च तक छह दिवसीय बजट सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2022 में भी गैरसैंण में विधानसभा सत्र नहीं हुआ। इसके बाद वर्ष 2023 में चार दिवसीय और वर्ष 2024 में तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2025 में गैरसैंण में बजट और मानसून सत्र आयोजित किए गए थे। वहीं, वर्ष 2026 में मार्च के बजट सत्र के बाद अब अक्टूबर में दूसरी बार विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई है।
पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को मिलेगा मंच
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित होने का महत्व केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रही हैं। भराड़ीसैंण में विधानसभा की कार्यवाही आयोजित होने से पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों और स्थानीय जनअपेक्षाओं से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने का अवसर मिलता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में गैरसैंण की भूमिका को मजबूत करने के साथ पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को भी प्राथमिकता दी जाए।
गैरसैंण उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक: धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण की भूमिका को सशक्त बनाना और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना सरकार की प्रतिबद्धता है। राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
गैरसैंण की विधायी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में पहल
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही गैरसैंण को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा होती रही है। पर्वतीय क्षेत्रों की आकांक्षाओं से जुड़े इस स्थान को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा मिलने के बाद यहां विधानसभा की गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता भी महसूस की जाती रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में वर्ष 2026 में दूसरी बार विधानसभा सत्र का आयोजन गैरसैंण की विधायी भूमिका को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब इस सत्र में होने वाली चर्चा और लिए जाने वाले निर्णयों पर भी नजर रहेगी। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, जनसमस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों को लेकर विधानसभा की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।







