19 मार्च 2026।
जंग के बढ़ते खतरे के बीच भारत की तेल और गैस सप्लाई, जिसे देश की ‘लाइफलाइन’ माना जाता है, इस समय समंदर में फंसी हुई है। ऐसे में भारतीय नौसेना पूरी तरह एक्टिव हो चुकी है और बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
भारत ने ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अपने कई युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य भारतीय कमर्शियल जहाजों, खासकर तेल और गैस टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देना और उन्हें खतरे वाले इलाकों से बाहर निकालना है। दरअसल, स्थिति इसलिए बिगड़ी क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव चरम पर पहुंच गया है। यह दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। लेकिन हालिया हमलों के बाद यह रास्ता लगभग बंद जैसा हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना ने आधा दर्जन से ज्यादा युद्धपोत इस इलाके में तैनात किए हैं। ये युद्धपोत सीधे जलडमरूमध्य में नहीं जाएंगे, बल्कि उसके पास रहकर भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट (सुरक्षा प्रदान) करेंगे और उन्हें सुरक्षित पानी तक पहुंचाएंगे। भारत के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का करीब 90% एलपीजी मध्य पूर्व से आयात करता है। ऐसे में सप्लाई रुकने का मतलब है देश में गैस संकट गहराना। हालांकि, भारत ने हाल ही में दो एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित वापस लाने में सफलता हासिल की है और बाकी जहाजों को निकालने के लिए बातचीत जारी है।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने अन्य देशों से भी इस इलाके में युद्धपोत भेजने की अपील की थी, लेकिन भारत ने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। भारत की नीति साफ है कि वह किसी एक देश के साथ खड़े होकर कार्रवाई करने के बजाय संयुक्त राष्ट्र के तहत ही कदम उठाता है।
यह पूरा मिशन ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत चलाया जा रहा है, जिसे 2019 में शुरू किया गया था। इसका मकसद खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा करना है। फिलहाल फारस की खाड़ी में कई भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी बातचीत की है। इस दौरान दोनों नेताओं ने फंसे हुए जहाजों की सुरक्षित निकासी और क्षेत्र में तनाव कम करने पर चर्चा की।
कुल मिलाकर, भारत इस समय एक संतुलित और सतर्क रणनीति पर काम कर रहा है—एक तरफ ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, और दूसरी तरफ वैश्विक तनाव के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना। अब सबकी नजर इस बात पर है कि होर्मुज जलडमरूमध्य कब तक सामान्य होता है और भारत अपने फंसे हुए जहाजों को कितनी जल्दी सुरक्षित निकाल पाता है।







