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भोपाल में ‘काली ईद’: काली पट्टियों के साथ अदा की नमाज, शिया समुदाय ने जताया विरोध और शोक ।

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भोपाल , 21 मार्च।

भोपाल में इस बार ईद-उल-फितर का रंग कुछ अलग नजर आया। जहां देशभर में खुशियों का माहौल था, वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिया समुदाय ने ‘काली ईद’ मनाकर विरोध और शोक जताया। इसके पीछे ईरान में हुए घटनाक्रम और धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर को वजह बताया जा रहा है।

भोपाल की फतेहगढ़ मस्जिद में शिया समुदाय के लोग काली पट्टियां बांधकर और सादे, पुराने कपड़े पहनकर ईद की नमाज में शामिल हुए। आमतौर पर ईद पर नए कपड़े और खुशियों का माहौल होता है, लेकिन इस बार वहां गम और आक्रोश साफ नजर आया। यहां तक कि बच्चों ने भी काली पट्टियां बांधकर विरोध जताया।

नमाज के बाद मस्जिद परिसर में खुतबे के दौरान माहौल और गरमा गया, जब लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। शिया समुदाय का कहना है कि हालिया घटनाओं और उनके “सुप्रीम लीडर” के निधन ने उन्हें गहरे शोक में डाल दिया है।

जानकारी के मुताबिक, समुदाय के लोगों ने इस बार न तो नए कपड़े पहने और न ही ईद की पारंपरिक मिठाइयों का आयोजन किया। कई जगहों पर लोगों ने खामेनेई की तस्वीर रखकर श्रद्धांजलि भी दी। नमाज के बाद श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं, जहां उनके योगदान को याद किया गया।

शिया समुदाय के नेताओं ने इस मौके पर तीन दिन के शोक की घोषणा भी की है। उनका कहना है कि वे इस बार ईद को उत्सव की तरह नहीं, बल्कि सादगी और शांति के साथ मना रहे हैं।भोपाल के अलावा इंदौर, रतलाम, बुरहानपुर और देश के कई अन्य शहरों में भी शिया समुदाय ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। वहीं, जम्मू, दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में भी लोगों ने सादगी के साथ नमाज अदा की और अमन-चैन की दुआ मांगी।

वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर अलग-अलग राय भी सामने आई है। कुछ धार्मिक नेताओं का मानना है कि ईद का त्योहार खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है, जबकि अन्य इसे शांतिपूर्ण विरोध का तरीका बता रहे हैं।

इस बीच भोपाल में ईद के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासन ने प्रमुख इलाकों में निगरानी रखी ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया।

देशभर में जहां ईद की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहीं भोपाल में शिया समुदाय का यह विरोध और शोक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।

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Author: New India News Network

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