24 मार्च 2026
क्या मुस्लिम दुनिया दो खेमों में बंटती नजर आ रही है?
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी अब खुलकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं—और चौंकाने वाली बात ये है कि ये दोनों देश ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ दे सकते हैं।
यानि अब यह टकराव सिर्फ तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में एक बड़े संघर्ष की आहट सुनाई देने लगी है…
वहीं, यूएई ने भी सख्त कदम उठाते हुए अपने देश में मौजूद ईरानी नेटवर्क से जुड़े संस्थानों—जैसे अस्पताल और क्लब—को बंद कर दिया है। इसे तेहरान के प्रभाव को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इस बीच, हालात तब और बिगड़ गए जब ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल की गई कुछ मिसाइलें बहरीन से दागी गई थीं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कूटनीतिक स्तर पर भी तनाव चरम पर है। सऊदी अरब ने ईरान के सैन्य अटैची समेत कई दूतावास कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है और ईरान पर अपनी संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण इन देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। तेल सप्लाई में रुकावट और सुरक्षा खतरे ने खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि, खाड़ी देशों के भीतर भी एक राय नहीं है। कुछ देश अभी भी कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहे हैं, लेकिन कई बड़े देश अब यह मानने लगे हैं कि ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, खाड़ी देशों को अब यह डर सता रहा है कि अगर ईरान को रोका नहीं गया, तो वह पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यही वजह है कि कुछ देश अब अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट को एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। अगर खाड़ी देश सीधे तौर पर इस जंग में उतरते हैं, तो यह संघर्ष और भी व्यापक और खतरनाक हो सकता है।
फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में खाड़ी देश क्या फैसला लेते हैं—कूटनीति या फिर युद्ध।







