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भारत की समुद्री ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी: आईएनएस तारागिरी और आईएनएस अरिदमन नौसेना में शामिल

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03 अप्रैल 2026।

भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम के नेवल डॉकयार्ड में अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी और परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल किया। इस ऐतिहासिक मौके पर सीडीएस अनिल चौहान और नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लिए एक मजबूत नौसेना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि देश की लगभग 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और करीब 95 प्रतिशत समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक नौसैनिक ताकत बेहद जरूरी है।

आईएनएस तारागिरी: आधुनिक स्टील्थ युद्धपोत
आईएनएस तारागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत विकसित एक उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसका वजन लगभग 6,670 टन है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ तकनीक है, जिससे यह दुश्मन के रडार पर बहुत कम दिखाई देता है। इस युद्धपोत में ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें तैनात हैं, जो इसे बेहद घातक बनाती हैं। इसके अलावा, यह पनडुब्बी रोधी युद्ध, एयर डिफेंस और लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम है।

आईएनएस अरिदमन: रणनीतिक शक्ति का स्तंभ
आईएनएस अरिदमन भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है, जो अरिहंत श्रेणी का हिस्सा है। यह भारत की परमाणु त्रिस्तरीय क्षमता (न्यूक्लियर ट्रायड) को और मजबूत बनाती है, जिससे देश जमीन, हवा और समुद्र—तीनों माध्यमों से जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम हो जाता है। इस पनडुब्बी की सबसे अहम विशेषता इसकी ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता है। इसका अर्थ है कि यदि भारत पर पहले हमला भी होता है, तो यह पनडुब्बी समुद्र के भीतर छिपकर दुश्मन को प्रभावी जवाब दे सकती है। यह क्षमता भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति को और मजबूत आधार प्रदान करती है।

हिंद महासागर में बढ़ती रणनीतिक मजबूती
इन दोनों आधुनिक प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने से भारत की समुद्री निगरानी, रक्षा क्षमता और रणनीतिक ताकत कई गुना बढ़ गई है। खासतौर पर हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, यह भारत को एक मजबूत और जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करता है। रक्षा मंत्री ने यह भी जोर दिया कि भारत को केवल अपने तटीय क्षेत्रों की ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, महत्वपूर्ण चोक प्वाइंट्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी।आईएनएस तारागिरी औरआईएनएस  अरिदमन का भारतीय नौसेना में शामिल होना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर देश की बढ़ती सैन्य शक्ति का स्पष्ट संकेत भी देता है।

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Author: New India News Network

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