📍 स्थान: नई दिल्ली
📅 दिनांक: 15 अप्रैल 2026
राजनीतिक हलकों में आगामी परिसीमन प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता कीर्ति आज़ाद ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
कीर्ति आज़ाद ने कहा कि परिसीमन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया हमेशा जनगणना के बाद ही कराई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि बिना अद्यतन जनगणना आंकड़ों के आधार पर किए गए किसी भी परिसीमन से प्रतिनिधित्व की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अगली जनगणना वर्ष 2026 में प्रस्तावित थी, ऐसे में उससे पहले इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

टीएमसी नेता के अनुसार, परिसीमन का सीधा संबंध लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधित्व से होता है। इसलिए यह जरूरी है कि इसे पूरी पारदर्शिता और सही आंकड़ों के आधार पर ही किया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने और सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेने की मांग की है।
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विभिन्न दलों के नेताओं और विशेषज्ञों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है। कुछ का मानना है कि परिसीमन को लेकर जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए, जबकि अन्य इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, परिसीमन प्रक्रिया का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना होता है, ताकि प्रत्येक क्षेत्र को समान प्रतिनिधित्व मिल सके। ऐसे में यदि यह प्रक्रिया बिना नवीनतम आंकड़ों के की जाती है, तो इससे असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है।
इस पूरे मुद्दे पर अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है और क्या सभी पक्षों के बीच सहमति बन पाती है या नहीं।
फिलहाल, परिसीमन को लेकर उठी यह बहस देश की राजनीति में एक अहम मुद्दा बनती जा रही है।







