पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी में इस्तीफों की बरसात लग गई है, जिसने संगठन की अंदरूनी स्थिति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।इस सियासी हलचल के बीच सबसे बड़ा नाम सामने आया है—पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शांतनु सेन का। गुरुवार को शांतनु सेन ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपना पद छोड़ा और अपने ही संगठन पर गंभीर सवाल खड़े किए। अपने इस्तीफे में शांतनु सेन ने आर.जी. कर अस्पताल मामले, अभया प्रकरण और नौकरी घोटाले जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से जनता ने पार्टी को नकार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अब उनका अंतर्मन उन्हें इन मामलों से दूर रहने को कहा है।
शांतनु के इस्तीफे के बाद टीएमसी में खबलि मच गई है क्योंकि टीएमसी टीम के मेंबर लगातार अपनी पार्टी को अलविदा कह रहे है ,ऐसे में बड़ा सवाल है की क्या सत्ता जाने के बाद टीएमसी के कार्यकर्त्ता नाराज या फिर बीजेपी के डर से वो पार्टी से इस्तीफा दे रहे है इसका ठीकरा अपनी पार्टी के के वरिष्ठ नेताओं पर फोड़ रहे है क्योकि इतिहास गवाह जिस भी राज्य में सरकार बदलती है विपक्ष की पार्टियों के नेता अपनी पार्टी छोड़कर सत्ता रूपी पार्टी में शामिल हो जाते है।अब ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा की नेता बंगाल की सत्ता ने विराजमान भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे या फिर किसी अन्य दल में लेकिन जिस तरह से शांतुन सेन ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को सीएम बनने की बधाई दी है उससे तो यही लगता है की शांतुनु सेन आने वाले दिनों में बीजेपी का दामन थाम सकते है।







